Thursday, 14 December 2017

ख्वाहिश मेरी आज भी है...

दर्द दे हद तक ए वक्त जीतने की ख्वाहिश मेरी आज भी है,
हुनरमंद हूँ ऊंची उड़ान भरने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।

इस माँझी को इश्क  की  कश्ती व वफा का पतवार दे दो ,
दिल के समंदर में तैर जाने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।

बदलते नहीं  जज़्बात मेरे  आमो-खास के हालात देखकर,
गुजारे सभी शराफत की जिंदगी ख्वाहिश मेरी आज भी है।

दो वक्त की रोटी की तलाश  है जो हमें बुला लाती है शहर,
वरना शुकुन से गाँव में बसने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।

आज पीने को  पानी नही मयस्सर  तश्नगी बुझाने के लिए,
बंजर जमीन पर बाग लगाने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।

वक्त बदल रहा है हल्के बर्तनों में ज्यादा आवाज आने लगी है,
सारे फूल एक  गुलदस्ते में सजी रहे ख्वाहिश मेरी आज भी है।

नशा कुछ और है कुँज ए शख्सियत में पैमाने मय से हटकर,
जमाने की  हलक में  मय न उतरे  ख्वाहिश मेरी आज भी है।

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          *****✍️Kunj sahu*****
                      (Teacher)
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मानवाधिकार कहाँ चली जाती है

जब बस्तर में नक्सलियों के खिलाफ,
सेना कार्यवाही को तैयार होती है,
खूंखार दहशतगर्द आतंकवादी को,
सजाए मौत  हुक्म सुनाई जाती है
तब मानवाधिकार के नुमाइंदों को गद्दारों,
व पत्थरबाजों में बेगुनाही नजर आती है,  नियम कायदे कानून के वास्ते देकर,
मानवता की बातें बढ़चढ़ बोली जाती है

ये देख भारतीय के मन से कुछ प्रश्न,
दिल और दिमाग में घर कर जाती है
जब बर्बरता पूर्वक गोली बंदूकों से,
बेगुनाहों के सीने छलनी की जाती है, मुफलिसी में जीवन जीने वालों की,
झुग्गी बस्तियों में आग लगाई जाती है, तब बेबस गरीबों की याद नही आती है,
ये मानवाधिकार तब कहाँ चली जाती है?

देश की रक्षा खातिर जवान शरहद पर,
हँसते हँसते जान न्योछावर कर जाते हैं,
पिता का स्नेह माँ का वात्सल्य संग में,
शहीद बेटे की याद में दम तोड़ जाती है,
औलाद अनाथ हो पिता को तरसती है,
पत्नी से उसकी मंगलसूत्र रूठ जाती है,
तब उस परिवार की याद नहीं आती है,
ये मानवाधिकार तब कहाँ चली जाती है?

भटकते सडकों पर मानसिक विकलांग,
जब उसेअभिशाप समझ बेघर की जातीहै
अनाथ बच्चे व गरीब दो वक्त निवाले को,
चौराहे व सिग्नल पर हाथ पसारे फिरती है
गर्भ में पल रही बेटी को जन्म से पहले तो
एक बेटी को दहेज केलिए मारदी जातीहै
तब समाजिक कुरीतियाँ याद न आती है,
ये मानवाधिकार तब कहाँ चली जाती है?

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            *****Kunj sahu *****
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ओखी...

*****ओखी *****
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गरमी के लहकत तपर्रा घाम झुलसाय,
चौमास पूरापानी त कभू सुख्खा गोखी।
जाड़ा भर सुर्रा ह हाड़ा ल कंप-कंपवाय,
दुबर ल दु अषाढ़आगे हे चकोरत ओखी।।

गोरस पियाय ले नइ कहूँ जहर ह जाय,
बइमान छांड डरय भले तन ले जोखी।
कुटुम्ब-सैना नइ कउनो ह ओला चिन्हाय,
चाबडरही ग ओहा करके कउनो ओखी।।

जोड़े दुनों हाथ तन ल खादी ले सजाए,
मारय लपरहा ह लबारी अड़बड़  चोखी।
सियानी पाए मइनखे के लहू चुहक जाए,
पाप लबारी लुकाय बर करय बड़ओखी।।

जांगर ल पेरत अपन महिनत ल पतियाए,
रापा गैंती संग हसिया कराय बड़ नोक्खी।
पछीना छींच कय माटी ले अन सिरजाए,
जीभर भाव नइ पाय काय करबे ओखी।।

कोरट-कचेहरी चक्कर म कहूँ पर जाय
सांप-छुछु कस किस्सा बन जाथे गोखी।
महिना पंदरही कइ बछर घलो बीत जाय,
टार तिथि भरकोठी जजवकील केओखी।

जंतर-मंतर,बनकट्ठा दवा उपचार बताय,
फूंकझाड़ म बने हो जबे झन हो तै दुखी।
टोना-जादू,अउ बाहरी हवा बिचार बताय,
ए लुट-खसोट करे बर ढोंगी मनकेे ओखी।

सरकारी कारज कराय पछिना छूट जाय,
बिन पइसा कौड़ी गोठ ल कोन समोखी ।
मइनखे ल दफ्तर दफ्तर अड़बड़ नचवाय,
ए हरे साहब बाबू के घुस खाय के ओखी।

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     *****✍️ Kunj Sahu ✍️*****
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किसान के अंतस के पीरा...

बछर कइ बछर कारी बदरिया हर संगी,
देखव न कइसे बरसे ल बिसरावत हे,
नदिया झिरिया तरिया खेती खार अउ,
गांव के बोरिंग कुआँ तको ह सुखावत हे।

खेती किसानी ल कइसे करबो कहिके,
सियनहा मुड़ धरे सरग ल निहारत हे,
पेट बर पसिया न तन ढा़के बर फरिया,
दुबर ल दु अषाढ़ मंहगई ह रोवावत हे।

बाबू बिन चाकरी के नोनी हावय सग्यान,
अपन दीनदशा ल देख मुड़ी ह पिरावत हे,
आंसो के बछर भांवर परा देतेंव बेटी के,
दाइज़ के जमाना म गरीबी ह बिजरावत हे

जम्मो जीनिस के अड़बड़ भाव आगर हे,  किसान के दाना माटी के मोल बेचावत हे,  पाइ पाइ बर साग भाजी के मोल करत हे,
दुनिया के रीति ल देखआँखी डबडबावत हे,

कते मेरा देखाय जाके वोअंतस के पीराल,
सुख भाग म नइहे वोतो दुख ल लुकावतहे धरती के हिरदे ल चिर सबके पेट पालेबर,
जम्मो के भला हो बिधाता ल गोहरावत हे,

टीवी पतरिका म रोज शोरसंदेशा आवत हे
साहूकारी बैंक के करजा म वो बोजावतहे
एक घव करजा म डुबके उबर नइ सकय,
खेती बेचाए के डर मा गर म फाँसी ओरमावत हे।।

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             *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
                २८//११//२०१७
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गरीब तान

****गरीब तान****
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मुर्हेडी़ कसअइठत जियत हन बिन परान,
ए दुत्कारतअपनअंतस के पीरा का बतान,
न कुरिया न खेती खार न कोदोअउ धान,
ये जग हाँसी बर सिरजाएआन गरीब तान,

मया का होथे कउनो जनवाव ग सियान,
ये सुदामा बर कृष्ण कस बनव ग मितान,
नहायखोरे बर साबुन सोडा ले अइनजान
चिरहा फरिया म मर्जाद बचान गरीबतान,

उसनाय चरोटा भाजी अउ दर्रा खानपान,
झिरिया के पानी म पेट के प्यास बुझवान,
बोट के पावत ले नेता हमर बेंदरा मितान,
हमन घोटाला के पैडगरी आन गरीब तान,

बड़े बड़े शहर बाशा हमर बर सपना जान,
खायबर खपरा नइहे जनम के ररुहा आन,
हमरले भागमानी बिलई कुकुर हे भगवान,
करमलेखा के नइहे ग पहचान गरीब तान,

खलइथ म रूपिया बिन रहिथन हलाकान,
ये जिनगी भुखमरी अउ बिमारी ले परेशान
बिन पानी पसिया अउ इलाज के मरजान,
कचरा सरी लेग जही शमशान गरीब तान,

पढ़ई लिखइ करेबर तय सोच मत नदान, बीए एमए कतको हे नौकरी नइहे असान,
रोजगार करि लेतेन त माल कहाँ ले पान,
मजुरी करबो जीबो खाखछान गरीब तान,

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            *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
                 ०९/१२/२०१७
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नेता जी...

आता जब चुनावी मौसम तो,
ये गली - गली बिलबिलाते हैं,
उजले खादी पोशाक के भीतर,
काले मन को छुपा कर आते हैं,

हाथ जोड़कर बडे़ नम्र भाव से,
चरणों में गिर लिपट वो जाते हैं,
घुटनों  के  बल बैठकर अक्सर,
वोटों के खातिर गिड़गिड़ाते हैं,

बात न बनते इतने से कहीं तो,
गिरगिट सा रंग बदल वो जाते हैं,
अंजान लोगों के बीच पहुंच कर
दुष्ट घड़ियाल की आँसू बहाते हैं,

काका-काकी व दीदी-जीजा तो,
किसी को माई-बाप बना जाते हैं,
अब पुरी होंगी बुनियादी सुविधाएं,
उम्मीदों का दिवास्वप्न दिखाते हैं,

कभी जात-पात,कभी धर्म पंथ तो,
बोली-भाषा के नाम पर लड़ाते हैं,
बहकावे में आकर देश की जनता,
अपनों के जानी दुश्मन बन जाते है,

साम दाम और दंड भेद अपनाकर,
कुर्सी के हकदार तो वो बन जाते हैं,
देश की एकता व अखंडता के लिए,
संविधान ग्रंथ की सौगंध खा जाते हैं

गरीब जनता जिनके दर माथा टेके,
भूले से भी अब वो याद नहीं आते हैं
बकरी के मेमने सा मिमयानें वाला,
सत्ता पाकर आँखें लाल दिखाते हैं,

करके सैकड़ों वादे देकर आश्वासन,
कर वादा खिलाफी मुकर जाते हैं,
मक्कारी गद्दारी रगरग में बसा हो,
एेसे महान मेरे देश में नेता कहलाते हैं,

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      *****✍️Kunj Sahu✍️*****
                    (Teacher)
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गजल

भीड़े दोस्त दोस्त से कभी,देखने ऐसा कुश्ती न मिला,
जमाने में कृष्ण सुदामा सा,वफापरस्त दोस्ती न मिला।

सजाए धूल से घरघुंदिया,खुशी में बचपन जो खिला,
गुल्लिडंडे कन्चे का खेल,वो बिंदास मस्ती न मिला।

मेरे खामियों को दूर कर,हीरा जड़ा तराश कर शिला,
गुरू सा शिल्पकार दूजा,कोईअद्भुत हस्ती न मिला।

जीवन में शोहरत हमें ,अपनी दुआओं से गया दिला,
माँ-बाप सा कोई दूजा,मांझी वाला कश्ती न मिला।

जात पात धर्म पंथ का, जहां न शिकवा हो न गिला,
ढूंढ़ा चराग जलाकर मैं,जमाने में ऐसा बस्ती न मिला।

बांट दो चंद साड़ी कंबल,कबाब संग दो जाम पिला,
लोग बेचते हैं गैरत भी, खरीदी ऐसी सस्ती न मिला।

भ्रष्टाचार हो रहा चहुँओर,घूस से रंगा हर हाथ नीला,
नमकहलाल हैं वे लोग,जिनको मौका परस्ति न मिला।

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        *****✍️Kunj Sahu*****
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Friday, 1 December 2017

दिल से मसखरी...

वो निगाहें मिला मुस्कराकर खेल इश्क की दांव गुजर गए।
मयखाने का रूख किए बगैर पैमाना हम पर छलका गए।।

नशा इश्क का  इस कदर गहराया दिलो-दिमाग में।
मय मय न रहा मय ए इश्क से मुझसे 'मैं'  छीन गए।

अपनें तो क्या हम खुद को पहचानने से कतराते रह गए।
बेकरार दिल ख्वाहिशों की दुनिया में बेबस रह गए।।

नादां था दिल जो अपनें व जमानें की बात समझने से रह गए।
उस दिल में इश्क ए जूनून है गलतफहमी में हम रह गए।।

हो बावरा बन भंवरा उन यादों की महक में मस्त रह गए।
मदहोश दिल तमन्ना ए इश्क की चाहत में इजहार कर गए।।

इश्क का मंजर इस कदर  तूफान ले आता है दिलों में।
उनका इन्कार ए मोहब्बत  दिले ए नासूर बनकर रह गए।।

मर्ज़ ए इश्क का तमाम जिन्दगी मरहम हम ढूंढते रह गए।
उम्र का तकाज़ा था वो दिल्लगी कर दिल से मसखरी कर गए।।

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    *****✍️KUNJ SAHU*****
                  (TEACHER)
Karesara, S/Lohara, Kabirdham
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                01//12//2017
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Monday, 27 November 2017

दिल ए तश्नगी ......

मुलाकात ए रस्म अदायगी को जो तुम मेरे घर आओगे,
आँखें छलका रिश्तेदारों से मिलकर चले जाओगे,
पर तुम्हें पता है मुझे इल्म न होगी इसबात का  जरा भी
क्योंकि ये रस्म मेरे सफर ए मौत के बाद निभाओगे
इसलिये राह ए जिन्दगी दिले  अरमान है ये मेरी,
तो क्यों न मुझसे तत्काल मुलाकात को चले आते,

मेरी बड़ी- बड़ी गुस्ताखियाँ अनदेखा कर जाओगे
गुनाह ए अजीम  तुम दिल से माफ कर जाओगे ,
यकीन मानिए मुझे बा इज्जत बरी कर जाओगे,
क्योंकि ये रस्म मेरे सफर ए मौत के बाद निभाओगे,
इसलिये राह ए जिन्दगी दिले ख्वाहिश है ये मेरी,
तो क्यों न मुझको जीते जी तुम माफ कर जाते,

हर महफिल में मेरे नाम के तुम नज्में जो सुनाओगे,
अपने दोस्तों से मिलकर मेरी शराफत को जताओगे,
काश गुजार पाते कुछ पल मेरे संग सोच पछताओगे,
क्योंकि ये रस्म मेरे सफर ए मौत के बाद निभाओगे,
इसलिये राह ए जिन्दगी दिले तमन्ना है ये मेरी,
तो क्यों न जीते जी हम मिलकर महफिल सजा जाते,

मेरे हरेक हुनर व फन की तुम तारीफ कर जाओगे,
गुजरे हर पल की एक एक दास्तान सुना जाओगे,
तब तक यारों रिश्ते निभाने में बडी देर कर जाओगे,
क्योंकि ये रस्म मेरे सफर ए मौत के बाद निभाओगे,
इसलिये राह ए जिन्दगी दिले मुराद है ये मेरी,
तो क्यों न इंतजार किए बगैर रिश्ते का दस्तूर निभा जाते,

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   🖋️🖋️  *****कुँज साहू *****🖋️🖋️
                    (शिक्षक पं.)
                २२//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
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Sunday, 26 November 2017

बढ़े चलो.. बढ़े चलो...

      ****बढ़े चलो.... बढ़े चलो...****
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न मन में कोई शक हो,
और न कोई कसक हो,
चित्त दिग्भ्रमित न  हो,
लक्ष्य से विचलित न हो,
ठान ली है  मन में जो,
पूर्ण वह संकल्प हो,
मन में ले विशुद्ध भावना,
बढे़ चलो..... बढ़े चलो ।। १।।

जो काम करते आए हैं,
वो काम आगे करना है,
संघर्ष करते आए हैं,
संघर्ष करते रहना है,
न परेशानियों से डरना है,
न मुश्किलों से हारना है,
मन में ले विशुद्ध भावना,
बढ़े चलो...... बढ़े चलो ।। २।।

संघ का यही अह्वान है,
सबका दिल ए अरमान है,
संविलियन ही है सपना,
विदित सकल जहान है,
पूरी होनी है मनोकामना,
माँ शारदे का वरदान है,
मन में ले विशुद्ध भावना,
बढ़े चलो.... बढ़े चलो... ।।३।।

हम सब जंग ए मैदान में हो,
अल्टीमेटम का कोई डर न हो,
वर्तमान सरकार हिल जाएगा,
गर इच्छा शक्ति विचलित न हो,
हर वक्त हौसला बुलंद हो,
इरादा फौलाद सा प्रचंड हो,
मन में ले विशुद्ध भावना,
बढ़े चलो..... बढ़े चलो ।। ४।।

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         *****कुँज साहू *****
                 (शिक्षक पं.)
             २४//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

अहसास ए दोस्ती...

मेरी जिंदगी में गर कोई मुसीबत,
अंजाने में कहीं दस्तक दे जाती है।
मेरे दोस्तों की दुवाऐं छा घटाओं सी,
आषाढ़ मेघ की अहसास कराती है।।

दुश्वारि सफर ए मंजिल की राहों पर,
राह ए रोड़ा बन बैठी मिल जाती है।
तो मेरे मित्रों के हौसला अफजाई से,
खुशी रिमझिम सावन सी बरस जाती है।।

हो जाऊं तन्हा गर जीवन में कभी,
मन हो मायूस उदास रह जाती है।
बन शरद पूर्णिमा का चाँद तब साथी,
दिल हर्षित कर चाँदनी सी चमकाती है।।

ख्वाहिश जो कभी किसी नयमतों की,
मन में गर कोई अरमान जग जाती है।
बन ऋतुराज बसंती  बहार  संगवारी,
सदाबहार खुशियों का मेला लाती है।।

प्रेमरस से भरी मुरली की तान सुरीली,
संगीत के सरगम की राग वो होती है।
कलम ए दवात लिख न सकूँ है वो यारी,  हर मौसम मेंअपनाअहसास करा जाती है

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              *****कुँज साहू *****
                      (शिक्षक पं.)
                  १५//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
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जागरण

तुम बिखरी हो नीले अम्बर पर,
ए सर्द चांदनी तु दस्तक दे जाना।
शीतलता को कम कर अपनी,
शबनम की छींटे चेहरे में दे आना।।

तुम जाना उसके आशियाँ पर,
प्रियतम को संदेशा सुना जाना।
भोर भइ अब अरुणोदय हुआ,
जरा उनको निद्रा से जगा अाना।।

ए ऊषा की सिंदूरी लाली किरणें,
जरा सी लालिमा उसे भी दे अाना।
सुर्ख हसीन रंगों से रंजन कर,
उनके चेहरे को जरा सजा जाना।।

पावन शीतल मंद समीर तु सुन,
फूल-कलियों से खुश्बू ले जाना।
मधुर मनोहर अति  मनभावन,
सुगंध से काया उनकी महका जाना।।

ए दिवाकर की सुनहरी आभा,
तन को कंचन सा सजा जाना।
उसे अंतःकरण का पैगाम देकर,
दिल में उतर  प्रेम दीप जला जाना।।

कलरव करते खग वृक्ष कुँज पर,
जा मुंडेर में उनके चहक जाना।
उस मृगनयनी चित्तस्वामिनी को,
श्रृंगार रस भरी  राग सुना जाना।।

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             *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
                १९//११//२०१७
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Thursday, 16 November 2017

नवंबर बीस आगाज है इंकलाब का

नवंबर बीस आगाज है इंकलाब का,
आज हमें नारा बुलंद कर जाना है।
अपने-अपने हिस्से का फर्ज,
हम सबको अदा कर जाना है।।

अब की बार  कोई फरियाद नहीं,
जंग ए जयघोष से हक को पाना है।
हर शिक्षक आज आंदोलित है,
सारे महकमे को ये संदेश दे जाना है।।

शिक्षक गर दृढ़ संकल्प करे तो,
असंभव भी संभव बन जाता है।
शिक्षक के दिशा-निर्देशन से तो,
शठ सुधर कर ज्ञानी बन जाता है।।

इतिहास गवाह इस बात का है,
क्यों लोग चाणक्य को भूल जाते हैं।
साधारण बालक चंद्र गुप्त जैसों को,
भारतवर्ष का अजय सम्राट बनाते हैं।।

आज सत्ता के नशे में चूर घनानंद(वर्तमान सरकार) को,
शिक्षक की परेशानी समझ नहीं आती है।
शायद झूठ- मुठ आश्वासन दे - दे कर,
निर्लज्ज को गुरू से मसखरी सुहाती है।।

शिक्षक जो लगता सरल साधारण,
लेकिन सरल साधारण नहीं होता है।
जो हो जाए दृढ़ संकल्पित शिक्षक तो,
जग में परिवर्तन असाधारण करता है।।

अब जब ऐसा अवसर आन पड़ा तो,
एक मुठ्ठी बन सुसंगठीत हो जाना है।
हर  मुसीबत से  लड़ने  को साथियों,
सबको  मिलकर  दमखम दिखाना है।।

हरेक जर्रे -जर्रे में संदेश भिजवा दो,
शिक्षक के क्रान्ति से सैलाब आना है।
अपनी सारी जायज माँगें पूरी करवाने को,
हर शिक्षक ने अब आर-पार का ठाना है।।

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             *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
               १६//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

Wednesday, 15 November 2017

कोई दूसरा मिल जाएगा....

 चिड़िया का  इक  नीड़ उजड़ गया तो क्या  दूसरा संवर जाएगा,
मैं नहीं मुकद्दर में तेरा  तो क्या तुझे कोई दूसरा मिल जाएगा।
फिरता  रहता हूँ  फिजाओं में बहारों के बादल बनकर संग  संग,
ढूँढता हूँ नीले आसमां से शायद मुझे मेरे मंजिल का पता मिल जाएगा।
कभी  तो  मेहरबान  होगा  खुदा  जरूर तरस खाकर  मुझपर,
तब तेरी  इकरार ए मोहब्बत होगी व  दिल का दर भी खुल जाएगा।
फिर तुम्हारी निगाहों  व यादों में बस एक ही चेहरा छा जाएगा,
तमन्ना होगी  मुझसे  मिलने की तो  दिल  तड़पेगा तुझे रुलाएगा।
कैसे रोक पाओगी छलकती अश्कों की  धारा को आँखों में आने से,
ये तो पानी है जोअपने बहने के लिए खुद ही रास्ता बना  जाएगा।
ये अश्कों की धारा मुझे तेरी गलियों में आने की वजह दे जाएगा,
यकीं हैं मुझे मेरे प्यार पर तब तेरे घर का दरवाजा खुला मिल जाएगा।
नशेमन इश्क में उनकी गलियों में रोज जाना फितरत सा हो जाएगा,
कि चेहरा चाँद सा प्रियतम का बाहर इंतजार में  झाँकता मिल जाएगा।
यूँ ही देखते - देखते परवान इश्क का  इस कदर  चढ़  जाएगा,
दीदार ए यार बगैर शुकुन न तेरे दिल  न कुँज के दिल को आएगा।
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            *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
               १३//११ //२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

Tuesday, 14 November 2017

उस शख्स का अश्क हूँ....

 मैं देखूं अपने चेहरे आईने में,
तो सोचता हूं कि मैं कौन हूं?
पर मुस्कुरा कर फिर करीब से
झांकु जो तो पाता हूं क्या?
मै तो उस शख़्स का अश्क हूं।।
                जो नि:श्चय  ही दिया है अपना
                जीवन का आनंद और सपना
                मुरादे जो चाहे भगवन से वो
                मुझ पर लुटाया है तो हूं क्या?
               मै तो उस शख़्स काअश्क हूं।।
नियम संयम हो आचार विचार
सब संग हो सुंदरतम व्यवहार
पाया हूं जहां से गुण ये सार
बरसाया जिसने दुलार तो हूं क्या?
मै तो उस शख़्स का अश्क हूं।।
                निज जीवन के सरस आंगन में
                सिंचित किया नव पल्लव को
                प्रेम - स्नेह की नीर  खाद  से
             सृजित किया तरुवर  तो हूं क्या?
               मैं तो उस शख़्स का अश्क हूं।।
मन विचार दृग-चिंतित उनका
काले बादल छटे तरू के संकट का
दूर निराशा हो समाधान जीवन का
आशाएं बंधी है मुझसे तो हूं मैं क्या?
वो मेरे पिता मै पुत्र कुंज हूं उनका।।
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        *****कुँज साहू *****
              (शिक्षक पं.)
          १२//१०//२०१७
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 Janam Diwas ki bahut bahut
         badhai ho my dear papa g
****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

दिल संभल जाए.....

हमें दिल के करीब इतना ही रक्खो कि दिल सँभल जाए,
इस क़दर भी  दीवानगी सेे न चाहो कि दम निकल जाए।।
मिले हैं यूँ तो बहुत पर रूह ए रूमानियत भी मिल जाए,
होंठों को छूकर रूह गर्मी-ए-अनफ़ास से पिघल जाए।।
मोहब्बत मेंअजीब है माली - हालात दिलों की धड़कन का,
इस दिल का  क्या एतबार जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए।।
देर न कर इजहारे इश्क में कि उम्र जो ख़्वाब में गुजर जाए,
हर तमन्ना ए मोहब्बत यहीं दिले हसरत बनकर रह जाए।।
यूँ तो होता नहीं नसीब मेहरबां सबों कि ख्वाहिश पूरी हो जाए,
लेकिन हो न दिलों संग ये गुश्ताखी कि इश्क यादों के सायें में खो जाए।।
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             *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
                १२//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

मेरी फिक्र अब न जाने कैसे..........

मेरी  फिक्र  अब न  जाने कैसे आदत  में  बदल  रही है
शायद यारों  मेरी  तबीयत  थोड़ी थोड़ी संभल  रही है
जो  सिहरन व  उलझन है  जीवन में  दुख  झेल  लेने का
वो अब धीरे-धीरे जीवन के तजुर्बे में  बदल  रही है
लिखा था  मेरे  जीवन में पुरे  एक बछर  का  वनवास रे  साथी
दौरान ए वनवास  मेरी  जिंदगी एक बार फिर से  संवर  रही है
बिखर गए थे अरमां सारे उजड़  चुके थे मेरे ख्वाबों का  नीड़
देखो मेरे राम के  रहमों - करम से एक  बार  फिर से संवर  रही है
देख के  मेरे  अपनों की  दुवाऐं स्नेह प्यार और  दुलार
जीवन  पथ  की  दुश्वारियां भी  अपने  में ही सिमट  रही है
फिर  जाऊँगा उन्हीं गांव  घर खेत खलिहान और  मदरसों में
ये  सोच - सोच  दिल  ए  नादान मस्त - मस्ती  में मचल  रही है
होगी  यारों  से  यारी  की  बातें जब  बैठेंगे  यारों के  संग
सोच  हृदय  हर्षित हो अपना धड़कन  की  कंपन  बदल  रही है
किस्मत  के  तारों  से  गर्दिशों के  बादल बिखर गई हैं
दिल के नाद  से  अल्हादित् हो नयन  ये  मेरे झर - झर बरस  रही है
मैं  छत्तीसगढ़िया  छत्तीसगढ़ के  आँगन में  पला  बढा  हूँ
जान  बूझकर कह  न  रहा  हूँ जूबां ए कुँज जज्बात  छलक  रही है।।
ॐॐॐ ॐॐॐ ॐॐॐ ॐॐॐ ॐॐ
          ****** कुँज साहू ******
                (   शिक्षक पं. )
             {{ १ /११/२०१७}}
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मेरा गाँव..

मैं जब भी  याद  करता  हूँ,
अपने गाँव को,
मुझे  वो  मनभावन  बस्ती,
 मेरे  शाला के  सामने की  गश्ती,
याद  आती है।
 वो बेल  के  पेड़ों  का  रवार,
 गाँव के बीच लगा  सुंदर,
 बजरंगी का दरबार,
 याद आती है।
गौरी  गौरा  चौक  में,
जब माताऐं और बहनें,
 होम  दीप  धूपबत्ती जलाकर,
गलियों को  महकाती है,
मुझे  वो  हर  लम्हा याद आती है।
शीतला माता के  मंदिर में,
बड़े बुजुर्गों  बच्चों के  संग,
 सुंदर  जसगीत व ताल में,
ज्योत जवांरा  लहराती है,
मुझे वह हर लम्हा  याद आती है।
सरोवर  तट पर  कबीर  कुटी से,
शंखनाद व घंटों के  संग,
दोहे  साखी  और  कुण्डलियां,
मधुर  आरती  गाई  जाती है,
मुझे वह हर लम्हा  याद आती है।
रामचरित मानस की गाथा,
बड़े बुजुर्गों बच्चों के  संग,
हर  सप्ताह  सरस  संगीत में,
भजनों पर गाई  जाती है,
मुझे  वह  हर  लम्हा  याद आती है।
क्या क्या  लिखूं ए कुँज बता,
मेरे मन को  सूझ न पाती है,
मुझे वह हर पल हर लम्हा याद आती है।।
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            *****कुँज  साहू *****
                      (शिक्षक)
               २९//०६ //२०१७
#######ॐनम:शिवाय########




****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

फुर्सत नहीं है मुझे......

मैं अपने  में  इस  कदर  खोया रहता हूँ।
कि  किसी आमो-खास की  चर्चा  करुँ।।
किसी के निंदा व तारीफ के पूलिंदे बांधु।
सच है कि  इतनी  फुर्सत नहीं है  मुझे।।
लोग  न  जाने  कैसे  बगलें  झाँककर यूँ।
पराये तो क्या फभकियाँ अपनों पर भी।।
उतार दिया  करते हैं ये  देख हैरान दिल। तसल्ली दे खुद को कि फुर्सत नहीं मुझे।।
जो जख्म दिखाए अपने अपना जान कर।
कि कोई लगा देगा मरहमअपना मानकर।
नमक की पुडिया लाते देख सकते में दिल
ठीक हूँ कहे खुद को कि फुर्सत नहीं मुझे।
कोई मेहनतकश इंसान  मुकाम पा जाए।
तो दिलएतमन्ना होती है कि जश्न हो जाए।
लेकिन करीबी ही दखल पहुंचाए तो दिल। यकीन दिलाता स्वयं कि फुर्सत नहीं मुझे।
अपनों को कामयाबी कि बुलंदी पर देख।
कुंठित विचाराभिव्यिक्त करते पाएहैं लोग
द्वेष रंजीतभाव से कटाक्ष करते देख दिल।
तु जैसाहैठीक है कुँज कि फुर्सत नहीं तुझे
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       *****कुँज साहू *****
              (शिक्षक पं.)
          २९//१०//२०१७
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ये जिंदगी हर वक्त अजीब रंग दिखाती है...

कभी बसंत के बसंती बहार ए चमन तो,
कभी पतझड़ के पर्णपाती वन बन जातीहै।
कभी सावन की रिमझिम बरसात तो,
कभीअनायास वृष्टिछाया क्षेत्र बन जातीहै।
ये जिंदगी हर  वक्त अजीब रंग दिखाती है.....।।

शरद  की दूधिया चांदनी सी दमकती है,
तो कभीअमावश की काली रात लगती है।
फागुनी रंग गुलााल की फुहार सी उड़ती है,
तो कभी ग्रीष्म की प्रचंड दिनोंसी लगती है।
ये जिंदगी हर  वक्त  अजीब रंग दिखाती है.....।।

गर नादानी नासमझी से निभाओ तो,
रंजो गम व झमेला बन रह जाती है।
तजुर्बे व शिद्दत से गुजारो गर इसे तो,
प्रतिपल हसीन यादों का मेला बन जातीहै।
ये जिंदगी हर  वक्त  अजीब रंग दिखाती है.....।।

हर वारदात में नई सीख सीखा जाती है,
अज्ञानी कोअनुभव से ज्ञानवान बनाती है।
जाने कब लड़कपन में समझदारी लाती है,
राह के पत्थर को बहुमूल्य हीरा बनाती है।
ये जिंदगी हर वक्तअजीब रंग दिखाती है......।।

दुनिया जीत हार के फेरे में पड़ जाती है,
मान अपमान के  भंवर में फंस जाती है।
द्वेष-ईर्ष्या की भावना मन में पाल जाती है,
प्रेमसद्भाव से भला क्यों रह नहीं पाती है?
ये  जिंदगी  हर  वक्तअजीब रंग दिखाती है....।।

हर रिश्ताअपनीअलग भूमिका निभाती है,
रिश्तों का तानाबाना सरस हो मुस्कुराती है।
गर कहीं गाँठ पड़ जाए तो दर्द बन जातीहै,
संबंधों में मेल होतो घर जन्नत बन जाती है।
ये जिंदगी  हर वक्त अजीब रंग दिखाती है.....।।
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              *****कुँज साहू *****
                     (शिक्षक पं.)
                ११//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

पिताजी...

स्नेह  से  जिनका  जीवन  संवरा,
अप्रतिम  प्रेम की  मूरत है  वो।
मंदिर  दरगाहों में  दस्तक दे  दे,
मन्नतें  जो  मांगे  वंदन  हैं  वो।।
            हर  राहों में  पकड़  बाँहों  को,
            मुझ राही का पथ प्रदर्शक है वो।
            आशिर्वाद से सिंचन करता जो,
            मुझ तृण को श्यामल मेघ है वो।।
उस परम् से इस धरा पर,
अवतरित ईश का स्वरूप है वो।
जीवन में तम को हर ले  जो,
उद्दीपित प्रकाशपुण्य पूँज है वो।।
          जो  आऐ विपदा  ग्रस्ने  को मुझे,
         अभेद्य मृत्युंजय सा ढ़ाल है वो।
          निर्णय  लूँ गर जीवन में कोई,
         तर्क दे विश्वास पूर्ण समर्धक है वो।।
उस  जीवंत  देवत्व तत्व  का,
है  अभिमान कि  अश्क  हूँ मैं।
यह  जीवन  क्या  हर  जीवन में,
मेरा  पिता  हो  वो  पुत्र  कुँज  रहूँ मैं।।
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            *****कुँज  साहू *****
                      (शिक्षक)
                १८//०६//२०१७
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संभव नहीं दिल से भूला पाना......

 *** संभव नहीं दिल से भूला पाना ***
याद आया आज वो बचपन
जब चंचल होता था अपना मन
कितनी प्यारी - प्यारी लगती थी
कितनी न्यारी - न्यारी लगती थी
दादा - दादी और नाना-नानी
जो हमको सुनाती थीं सुंदर
किस्से और प्यारी कहानी
छोटी सी खुशीयों में हँसना
छोटी-छोटी जिद में रो देना
वो पापा का गुस्से से देखना,
डर से कांपकर सिमट जाना,
तब माँ को देखकर आती सामने
सिसकियाँ लेते आँसू पोछना
माँ के गोद में सिमट  जाना,
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच  कहता हूँ वो बचपन की यादों को  संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।

स्कूलों के  दिनों में
सुबह-सुबह में तैयार हो जाना
वो कलम को घीस कर
उसमें धारदार नोंक बनाना
परचून की दुकान  पर  जाकर
पच्चीस पैसे का अखबार ले आना
नए कापी पुस्तक में जिल्द चढ़ाना
अपनें नाम को रंगों से सजाना,
शिक्षक दे गर शाबाशी  तो
सारे सहपाठियों को  बताना,
सवाल का जवाब गलत हो जाए तो
कापी बस्ते में डाल दुबककर बैठ जाना
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच  कहता हूँ वो बचपन की यादों को  संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।

याद है मुझे आज भी,
वो डी. डी.  वन का  जमाना
फिल्म धारावाहिक देखने के लिए,
घंटों झिलमिलाते टी.वी. के सामने
बार- बार उल्टी सीधी गिनती गिनकर,
इंतजार के समय को बिताना,
छोटी - छोटी बातों में झगड़कर,
संगी - साथी  से खी हो जाना,
कुछेक घंटे गुजर  जाने के बाद
फिर आपस में हंसते हुए मिल जाना
वो काँच  के  कन्चों की जीत हार
गुल्ली डंडा के खेल में फेर फिराना,
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच  कहता हूँ वो बचपन की यादों को  संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।

करके गुस्ताखी अंजान बने रहना
फिर पड़े डाँट तो उलझन में पड़ना
ना कोई गम, ना कोई डर होना
बस खेल-खिलौनों का फिक़र होना
दिल में कोई कपट न जलन होना,
मन का  सब तरह निशंक रहना
बस अपने  ही  धुनों में खोया  रहना
अब जीवन के लिए संभव नहीं
उस सुनहरे  अतीत में लौट  पाना
माँगू वरदान ऐ भगवान गर तुमसे  तो
कर दया  मुझ पर  उपकार ये करना
फिर से मेरा वो प्यारा बचपन मुझको,
मेरे यादों संग सूत  समेत लौटा जाना
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच  कहता हूँ वो बचपन की यादों को  संभव नहीं दिल से भूला  पाना......... ।
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             *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
               १४//११//२०१७
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Sunday, 12 November 2017

सुघ्घर अकती के तिहार

चलौ  संगी  जुरमिल  मनालन
सुघ्घर  अकती  के  तिहार
दाईं  दीदी मन  करलौ तुमन
करसी  अउ  चुकिया  ल  तइयार
थोरकुन  चाउंर  संग  म
चना  अउ  उरिद  के  दार
चढा  लेथन  आमा  बर  पिपर
गांव के  देवी-देवता  म  जलधार
कहाँ  पाबे  संगी  छत्तीसगढ़ी कस
गुरतुर  भाखा  मया  अउ  दुलार....... ।।
रामनवमी के  लगीन  धराय
अकती  ह  आगय  भांवर  पराही
सरई  सैगोना के  मडवा  सजाए
दुवारी म  पर्रा अउ बेंदरा  बंधाए
दूल्हा- दुल्हिन के  मन  गदराए
बरात  जवइया  मन  मटमटाए
ताल  म  गडवा  बाजा  बजाए
बरात  परघाय  मउर  सउपाय
टिहिर टिहिर सुघ्घर मोहरी के घुन
दुल्हिन बिदा बर  होगय  तइयार
कहाँ पाबे संगी छत्तीसगढ़ी कस
गुरतुर भाखा मया अउ दुलार......... ।।
खेती किसानी के  बुता  बाढ़गे
काँटा  खूँटी  बिने बर  होजा  तइयार
महिनत  करय जम्मो  संगवारी
छिहिल  छिहिल  दिखय  खेत - खार
अबके  बछर  जे  बरसय  बदरिया
हो जय  संगी  हमरो  बेडा  पार
आ ना  पेजयारीन  भूख  म झन  मार
बासी  पेज  पताल  चटनी  ल उतार
कहाँ पाबे संगी छत्तीसगढ़ी कस
गुरतुर भाखा मया अउ दुलार....... ।।
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           ***** कुँज  साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
               ०३ //११//२०१७
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Saturday, 11 November 2017

   *****शायरी और  गजलें *****
                     (०६)
जज्बातों  की  राह में  हार  कर  ।    
 क्यों  मुकद्दर  से  शिकवा  करते  हो।।
 शिकवा बला  ए  दिल  से  करो।
जो रिश्ते बुनने की कोशिश करती है।।
                     *****
                      (०७)
हरेक के  उमर  यौवन  में मोहब्बत का  प्यास  होता है।
पडाव उम्र का सोलह साल हो तोअहसास  होता है।।
प्रियतमा  से मिलकर चाँदनी रातों में रास
होता है।
कमसीन उमर में इश्क का नशा भी खास  होता है।।
                       *****
                       ( ०८)
दरिया  को  समंदर  में  मिलने  की  चाहत  बयां  हो  नहीं सकता।
इश्क का  तूफान  उम्र  आने  पर  कोई  थाम  नहीं  सकता।।
दिलबरा  से  मिलने की  उम्मीद  दीवाने  में  हुआ  करती है।
चाहे लाखों पाबंदी लगा ले मिलन से कोई रोक नहीं सकता।।
                        *****
                         (०९)
             *****गजल *****
माशूका की खूबसूरत  चेहरे पर,
मधुरतम्  मुस्कुराहट हो  तो  मजा आ जाये।
नैन नशीली  व कजरारे हो पर,
चाल में जरा सी बलखाहट हो तो मजाआ  जाये।
कदमों से  घुँघरू की  आहट हो पर,
दुपट्टों में हवाओं से सरसराहट हो तो मजा आ जाये।
कलाइयों में पहनी  हो  कंगना  मगर,
चूड़ियों में जरा सी खनखनाहट हो तो मजा आ  जाये।
साजन के  लब  शबनमी  हो  पर,
अदाओं  से  बिजलियाँ  गिराए  तो  मजा आ  जाये।
मिलन की  बेला में लालिमा हो पर,
चेहरे में जरा सी हो घबराहट  तो  मजा आ  जाये।
मैं बेचैन हो रहा हूँ बाँहों में लेने को मगर,
बेलाओं के  जैसी  शरारत उमड़ पड़े तो मजा आ  जाये।
                       *****
                        (१०)
                *****गजल *****
यूँ तेरा वो चिलमन  से  छुपकर  देखना
नजरें  मिलने पर आँखें शर्म से ढक लेना
गलियों में तेरा वोअचानक सामनेआजाना
एकाएक मेरे दिल की धड़कन का बढ़ना
तेरे  दिल की बेचैनी  की खबर दे जाती है

कि शायद जितना बेकरार है ये मेरा दिल
गुश्ताखियाँ कर रहा हो तुम्हारा भी दिल
कि  तेरा  पनघट  पर  जाते  हुए  पलटना
मुड़ मुड़ कर  तुम्हारा  यूँ  मुझको  देखना
तेरे  दिल की बेचैनी की खबर  दे जाती है

 तुम बैठे रहती गुफ्तगू करते सखियों संग
हँसी ठिठोली करते रंगी रहती हो अपनेरंग
कि मेरा अनुमान है कि वहां मेरे पहुचने से
तेरा  शर्माकर  मुझसे  यूँ  नजरें  चुरा  लेना
तेरे  दिल की बेचैनी की खबर दे जाती है

मेरी हार पर मायूस होकर तेरा चले  जाना
जीत जाऊँ तो तेरा चहक कर खुशीमनाना
दिल की  अपनी  बात यूँ  दिल  में दबाना
तेरा  कहते- कहते रुककर  होंठ चबाना
तेरे  दिल की बेचैनी की खबर दे जाती है
                      *****
                       (११)
गर  किसी  से  मोहब्बत  हो  गई  है तो,
बेकरारी  को  दूर  कर इजहार कर लेना।
मौका जो आए इश्क में मंजिल पाने की,
तो  बड़ी  शिद्दत से  इकरार  कर लेना।।
वो भी क्या जमाने थे वर्षों इम्तहां देने का,
आशिक गलियों में इंतजार किया करते थे
अब दीवानों में वोआशिकी का दौर न रहा
मिले जो दामन में प्यार स्वीकार कर लेना।    
  ***// *****//*****//*****//***
           *****कुँज  साहू *****
                     (शिक्षक)
               ०५//११//२०१७
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*****सर्वाधिकार सुरक्षित है *****




                   




              

शायरी

जिन्दगी की  राह में  हार कर  क्यों,
                     मुकद्दर  से शिकवा करते हो।।
शिकवा बला ए दिल से करो,
                    जो रिश्ते बुनने की कोशिश करती है।।
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                           KUNJ
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*****सर्वाधिकार सुरक्षित है *****

किसान

न  कोई  बहाना  करता  हूँ,
न कोई  फसाना  गढ़ता  हूँ।
न कोई  शिकवे  दिल में है,
न  कोई  शिकायत  मढ़ता हूँ।।
धरती के  सीने  को  चीरकर,
नव पल्लवन को बीज बोता हूँ।
दगा  दे  काले  मेघ  कहीं  तो,
उसे  श्रम - कणों  से  सिंचता  हूँ।।
हर  वक्त  जीयो  और  जीने दो,
ये दिल में  भावना  करता  हूँ।
हर  जीवन  का हो  परवरिश,
विधाता  से  ये  दुवा  माँगता  हूँ।।
मैं भी तो एक  इंसान  हूँ  आखिर,
गर मैं  दुनिया  से अपनेपन की।
दिल  के  कोने  में  अरमां  सजाऊँ,
तो किसान मैं कुँज क्या बुरा चाहताहूँ।। #####################
       *****कुँज  साहू *****
               (शिक्षक पं.)
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*****सर्वाधिकार सुरक्षित है *****

शायरी और गजलें

      ****शायरी और गजलें ****
                      ( १ )
इश्क  जज्बातों  की  लहरें  लेता समंदर है।
जिंदा हैं वे जिनके दिलों में इश्क का  मंजर है।।
वरना  जिंदा  होकर भी नादान  शरीर  मुर्दा है।
बेशकीमती होकर भी ये  जीवन  धूल  का  गर्दा है।।
           -----------*****----------
                         ( २ )
इश्क में  ज्यादा  जज्बाती  नहीं  हुआ  करते।
इश्क ही  मंजिल ए मुकाम  नहीं  हुआ  करते।।
जरा  सोच हटकर सारे  कायनात के  बारे
में।
कइयों को  मोहब्बत  नसीब नहीं हुआ  करते।।
               ---------*****----------
                          ( ३ )
वो  इश्क  इश्क  ही  क्या  जो  बदनाम हो  जाए।
वो मोहब्बत मोहब्बत नहीं जो गुमनाम हो  जाए।।
आशिक  तो  वो  ही  सच्चा है इस जहाँ में यारों।
जो  चरागों  सा  जलकर  खुद  कुर्बान  हो  जाए।।
          ------------*****----------
                        ( ४ )
भंवरा बागों  में  जाकर  कलियों  से  पराग  चुनते हैं।
मदमस्त मस्ति में मयकशी  के  आलम  में  घुमते  हैं।।
इश्क की  मर्ज  से  घायल हो बन  परवाना
फिरते हैं।
तड़पकर मरहम ए इश्क का ठिकाना पूछते हैं।।
रोग  इश्क का  लगने  से  पहले  कहाँ वो सुनते हैं।
हर  दरख्तों में ठहर हकीम ए दवाखाना  ढुढ़ते  हैं।।
मुलाकात  हो उनसे जिसे आशिकी का  मारा  कहते हैं।
मयखाने में जाम छलका मर्ज ए इश्क का
दवा मानते हैं।।
               ***,,, ****,,, ***                        
                        ( ५ )
प्याले  में जाम पुराना हो तो मजा  देता है।
इश्क का नशा  जरा सबसे दूजा होता है।। वफा परस्त  हमसफ़र हो तो मजा देता है।
नुँर ए जिन्दगी इसी जँहा में सजा देता है।।
गर  रुसवा हो जाए कहीं मोहब्बत  यारों।  इश्क  परवाने  को शमां मे  जला देता है।।
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            *****कुँज  साहू *****
                   ( शिक्षक  पं.)
                 ०१/११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

आजादी

आजादी की फिर से चिराग  जलाने की  बारी है,
मेरे वतन की  राहों में  भरी  पड़ी  दुश्वारी है।
कहीं  गरीबों की सिसकियाँ तो कहीं बिमारी है,
बाढ़ से  बर्बादी  तो  किसानों की लाचारी है।
मंहगाई है पांव  पसारती कम होती  खुद्दारी है,
धनवान के मन में धन के लिए भरी मक्कारी है।
कर्मचारी और अधिकारी  देखो  भ्रष्टाचारी है,
जनता ने चुना जिसे उन्में भरी हुई  गद्दारी है।
क्या क्या लिखूं मैं  दोस्तों युवाओं  में हर तरफ बेगारी है,
समाज के  हर  तबके  में मौज  उड़ाते  दुराचारी हैं।
इसलिए तो  कहता है  कुँज कहाँ मिली  पूरी  आजादी है,
एक बार फिर  करनी  होगी आजादी के जंग की तैयारी है। 
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            *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
               १५//०८ //२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

कहीं बदनाम न हो जाए

       कहीं बदनाम  न हो जाए
ये मेरा  दिल  दिल न  रहे  मयखाने  की  सुनहरी  जाम  हो  जाए।
चिरागों सी  दमकती  रहे ये  आँखें जब सुबह  ढलती  शाम  हो  जाए।।
अजीब  उलझन में  था  ये मेरा दिल कि कहीं  जाकर  न  खो  जाए।
कि  मेरे  दिल  का  सौदा  सरे आम  कहीं  बीच  बाजार  न हो जाए।।
फिर भी  अहतियात  बरतते  थे  उन  गलियों में  जानें  से।
कि कोई मासूम  दिल  हमारे  नाम से  बदनाम  न हो जाए।।
जिन्दगी के  सफर में इस तरह  आवाज़  दो  हमको।
मंजिल पा  भी  जाए और  सफर में  शाम  हो  जाए।।
गर्दिश में  सितारे हों मेरे  दिल के फिर भी ये दिल  राग  सुनाए।
दिल  ए  नादान  कुँज  तेरे  ही नाम  की  गजल  गुनगुनाए।।
मुझे  मालूम है  वो  ठौर  ठिकाना वो  खूबसूरत  आशियाना।
फिर भी  रुक  जा  ऐ मेरे  दिल  कि  वो  कहीं  बदनाम न हो जाए।।
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          *****कुँज  साहू *****
                  (शिक्षक  पं.)
               ०१//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

यादें..

               ****  यादें ****
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दिल की  चाहत है कि दिल के सामने सदा ही दिलकश नजारा रहे।
ये दिल कभी संजीदा न रहे  चाहूँ  ये हर वक्त आवारा रहे।।
संजीदगी सादगी से इंकार नहीं पर  बंधन  सा अहसास होता है।
मैं  मानता हूं दिल के दीवानापन में दीवानगी खास होता है।।
मोहब्बत का मजा वो हरगिज नहीं ले पाते हैं  यारों।
जिनका दिल वक्त  बेवक्त  किसी की  यादों में उदास होता है।।
तो क्या जिन्दगी में यादों का कोई अहमियत नहीं होता है।
यादें क्या हमारे जहन में एक फजीहत होता है।।
फजीहत नाम देकर यूँ ही यादों को बदनाम न  कर।
यादें  तो  मोहब्बत की ईबाबत करने का राज  होता है।।
गर उदास हो  मन  तो  हमें  कोई  साथ  नहीं  देता है।
भरी  महफिल में सब  तन्हा  व  नागवार गुजरता है।।
तब  यादों के साऐं में  चर्चा दिल ए आम कर  देख  लेना।
क्योंकि तन्हाई में भी  यादें हौसला  बुलंद कर  महफिल  का  अहसास  देता है।।
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             *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
                ०१//११//२०१७
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*****सर्वाधिकार  सुरक्षित है *****

अच्छी बात नहीं....

जीवन पथ पर तुम जरा संभल जाना,
प्रतिपल - प्रतिक्षण तुम सदा मुस्कुराना।
छोटे- छोटे तकरार में यूँ न रूठ जाना,
लेकिन अपनों से यूँ रुसवा हो जाना अच्छी बात नहीं..........//१//

कभी अति- हर्षित हो उल्लासित रहना,
जुबां ए लबों से जरा संभल कर कहना।
वादा किया तो वादा ए वचन निभाना,
लेकिन वादा करके  यूँ  मुकर  जाना अच्छी बात नहीं...... //२//

सफर ए जिन्दगी दुश्वारियाँ बहुत है,
हो जाती अक्सर  नादानियाँ बहुत है।
नादानी को तुम समझदारी  में बदलना,
लेकिन इंसान में इंसानियत का न होना अच्छी बात नहीं........ //३//

संग अपनों के अपनेपन से ही रहना,
कभी तुम यारों की याराना न परखना।
विश्वास तोड़ कर तुम सितमगर न होना,
लेकिन यारों  से  यूँ  खफा हो जाना अच्छी बात नहीं......... //४//

बेबस लाचार पर हरदम रहमत दर्शाना,
कमजोरों का हाथ  बढ़ाकर देना सहारा।
जोश में चलना कदमों से कदम मिलाना,
लेकिन गरीब  मजलुमों पर  तेवर दिखाना अच्छी बात नहीं......... //५//

संभाले खुद्दारी का यश वैभव  रखना,
विपत पड़े पर तुम टूटना न झुकना।
आए बाधाऐं मंजिल के राहों में न रूकना,
लेकिन सर झुका कर गैरत को  बेचना अच्छी बात नहीं........ ..//६//

मानव हो मानवता जीवन में सदा रखना,
दानव बनकर जीनें की कोशिश न करना।
बरखा जल- सम मधुकर सरस बरसना,
लेकिन काले घन- सम गरजकर रह जाना अच्छी बात नहीं.......... //७//

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            *****कुँज साहू *****
                   (शिक्षक पं.)
                ०२//११//२०१७
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*****सर्वाधिकार सुरक्षित है *****

शायरी

              *****शायरी*****
गुलशन गुलिश्तां की सदियों तक यूँ ही  संवरती  रहे,
वादियों में  अमन के फूल यूँ ही  महकती  रहे।
आपकी  और  हमारी  मुलाकातों  की  दौर चलती  रहे,
बातों ही बातों में दोस्तों महफिल हमारी सजती रहे।।
                      *******
शुभंकरों में हल्दी  रोली  गंध व चंदन है,
चंदनों में भी खास पितांबरी का वंदन है।  सज गई आपके चाहने से सुंदर महफिल,
खुशनुमा माहौल में आप  सभी का हार्दिक  अभिनंदन  है।।
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सुहागन के माथे पर सिंदूरी लाली चाहिए,
सुमन के महकने के लिए फुलवारी चाहिए
महफिल  को  सजते  देर  न  लगेगी  यारों
आप लोगों के चेहरे पर मुस्कान व हाथों की ताली  चाहिए।।
                    ********
दोस्ती  ऐसे करो कि धड़कन में बस जाए
सांस भी लो तो  खुशबु उसी के  आए।
दोस्ती का नशा दिल में  ऐसे छा जाए,
बात कुछ भी हो पर याद दोस्त की आए।।
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दोस्ती  गजल है गुनगुनाने के लिए,
दोस्ती नगमा है सुनाने के लिए।
ये वो जज्बा है जो सबको नहीं मिलता,
क्योंकि हौसला चाहिए दोस्ती को निभाने के लिए।।
                     ********
मुकद्दर  ने इतनी  सी जिन्दगी में,
मुझे  बहुत  कुछ  नवाजा है।
जो नयमतें मुझे  मिलना  था,
हरेक  उपहार  से  सजाया है।
गिला  करें तो  किस बात का  कुँज,
वो तो माँगने से पहले सब कुछ दे डाला है
                     **********
बहुत  आसान है  जमीं पर,
           आलीशान मकान  बना लेना।
मुश्किल है लेकिन दोस्तों,
          किसी के दिल में जगह बना पाना।
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मुझे किसी  शिखर पर  पहुंच कर नाम  की  चाहत  नहीं।
मेरी  मर्ज ए काया  ने  इतना शोहरत  जो  बख्शा  है।।
                    ***********
मुझे डर  अंजाम  से  नहीं,
                  बल्कि उम्मीद से लगता है।
जो  मेरे  अपने  मेरे  आने की,
                   दिल से  लगाए  बैठे हैं।।
                   ************
मशगूल थे हम कुछ  इस कदर  अपने में,
जीते रहे हम बेखबर बेखौफ  सपने में।
हकीकत तब हुई बयां जब नींद से जागे,
जागे तो क्या लुटा चुके थे जिन्दगी सपनेमे
                    ***********
जिन्दगी जिन्दगी की हर वक्त  तलाश में,
हर पल  मिलती है  बस  यही आश में।
कुछ  तो लिखा होगा वो  भी मेरे भाग में,
मैं क्या जानूँ जिन्दगी पहुँच गई मंजिल में,
जिसे आगाज समझा पहुँच गयाअंजाम में
                    *********
चाँद अधूरा है चाँदनी  के बिना,
          बिजली अधूरी है दामिनी के बिना।
बसंत  अधूरा है बहारों के  बिना,
          यारी  अधूरा है यारों के  बिना।।
                    ***********
चमन ए अमन बसने के लिए बस्तीचाहिए
दरिया को पार करने के लिए कश्तीचाहिए
शोहरतें जहाँ के लिए माकूल हस्ति चाहिए
मुस्कुराना हो ताउम्र तो दोस्तों की  दोस्ती चाहिए।।
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           ***** कुँज  साहू *****
                   (शिक्षक  पं.)
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*****सर्वाधिकार  सुरक्षित है *****

Friday, 10 November 2017

जरा फुरसत से तु सोच जिन्दगी

जरा फुरसत से तु सोच जिन्दगी, 
आखिर क्या खोया क्या पाया है। 
जीवन का दस्तूर यही है,  
कभी धूप तो कभी छाया है।। 

पाया जो उपहार वो भूल गया, 
हर पल तू दुखड़ा रोया है।  
मिली जो खुशियां सहेज न पाया, 
लोलुपता  में  जीवन बिताया है।। 

जीना - जीना है कहता आया, 
फिर जीना सीख न पाया है।  
दुनिया के आडम्बरों में फंस कर, 
तुने सारा जीवन गंवाया है।। 

चितवन हरदम उद्विग्न रहा, 
शांत रस में  ठहर नहीं पाया है। 
आएगा जीवन बड़ा  उत्सव लेकर, 
ये सोच हर लघु उत्सव ठुकराया है।। 

धर्मों में तो धर्म बड़ा मानवता का है, 
सब  अपना नहीं कोई पराया है। 
मुसाफिर सभी जीवन के डगर में, 
ये दुनिया तो बस एक सराया है।। 

कर अंतर्मन से कभी याद उन्हें, 
जिसने यह अद्भूत श्रृष्टि बनाया है। 
वह कण-कण में है रमा हुआ, 
 राम हर हृदय कुँज में समाया है।। 
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        ***कुँज साहू ***
            (शिक्षक पं.)
         १०//११//२०१७ 
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Saturday, 4 November 2017

श्रावण मास

       *****श्रावण मास *****

शिव शंकर के बोल  बम  नारों  संग,
                      श्रावण मास की आगमन  हुईं है।
जहाँ भी  देखो धरा की आँचल , 
                     एक  रंग में  बस  हरी  भई  है।। 
हर हर  बम बम की जयकारों  संग, 
                    कांवरिया शिव जी के  धाम चली  है। 
 न भानू की तपिश  रोक  सकी है, 
                      न पांव की  छाला बाधा  बनी है।। 
वन उपवन पगडंडी से  होकर, 
                      झाड़ झरोखा सरिता  को  पार कर। 
मन में लिए  भक्ति की  ज्योति, 
                       देखो  कांवरिया  की  झुंड  चली  है।। 
रेवा गंगाजल पंचामृत धारा से, 
                      अभिषेक महादेव की  होने  लगी  है। 
सुंदर  बेला  को  देख  हो  हर्षित, 
                      कारी बदरिया भी बरसन  लगी है।। 
बरखा के  जल से ताल सरोवर, 
                       दामन भर खुशियों से लहरा रही है। 
चंचल मन जैसे नव यौवन का, 
                        मानों  ये  सावन  बलखा रही है।।  
फूल  खिले हैं कनेर  मनभावन, 
                        बरगद डाल पर झूले पड़े  हैं। 
रहचुलिये पर  बैठी  एक सखी, 
                         औरन को भी  बुलावन  भेजी है।। 
नागपंचमी के उत्सव में  देखो , 
                         कुश्ती कबड्डी  की दांव लगी है। 
नवयुवक  सब ताल  जमाकर, 
                          मूछों पर  ताव  वो  दे  रहे  हैं  ।। 
श्रावण मास की  शोभा  निराली, 
                          गांव गांव  रामझुले की  खुशहाली। 
भाव भक्ति और लय तालों में, 
                          मेरे  राम जी की  स्तुति  होने  लगी है।। 
भाई-बहन का  रिश्ता  ये  पावन, 
                          अटूट बना दे  इसे  सुंदर  श्रावण। 
ममता  स्नेह की  थाल सजाकर, 
                          सौगंध रक्षा  की  दिलाने  चली  है।।  
अलौकिक  दशा  देख  श्रावण  की,  
                         शिवमास  की अंतस में छवि बसी है। 
हो कृपा  महाकाल की  मो  पर, 
                          कुँज के  हृदय की  आश  यही  है।।     

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                ****कुँज साहू ****

                      (  शिक्षक )   

ॐॐॐॐॐॐनम:शिवायॐॐॐॐॐॐ   

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