दर्द दे हद तक ए वक्त जीतने की ख्वाहिश मेरी आज भी है,
हुनरमंद हूँ ऊंची उड़ान भरने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।
इस माँझी को इश्क की कश्ती व वफा का पतवार दे दो ,
दिल के समंदर में तैर जाने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।
बदलते नहीं जज़्बात मेरे आमो-खास के हालात देखकर,
गुजारे सभी शराफत की जिंदगी ख्वाहिश मेरी आज भी है।
दो वक्त की रोटी की तलाश है जो हमें बुला लाती है शहर,
वरना शुकुन से गाँव में बसने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।
आज पीने को पानी नही मयस्सर तश्नगी बुझाने के लिए,
बंजर जमीन पर बाग लगाने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।
वक्त बदल रहा है हल्के बर्तनों में ज्यादा आवाज आने लगी है,
सारे फूल एक गुलदस्ते में सजी रहे ख्वाहिश मेरी आज भी है।
नशा कुछ और है कुँज ए शख्सियत में पैमाने मय से हटकर,
जमाने की हलक में मय न उतरे ख्वाहिश मेरी आज भी है।
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*****✍️Kunj sahu*****
(Teacher)
Karesara, S/Lohara, Kabirdham
(C. G.) Mb. 9993396300
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All copyrights are reserved.
हुनरमंद हूँ ऊंची उड़ान भरने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।
इस माँझी को इश्क की कश्ती व वफा का पतवार दे दो ,
दिल के समंदर में तैर जाने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।
बदलते नहीं जज़्बात मेरे आमो-खास के हालात देखकर,
गुजारे सभी शराफत की जिंदगी ख्वाहिश मेरी आज भी है।
दो वक्त की रोटी की तलाश है जो हमें बुला लाती है शहर,
वरना शुकुन से गाँव में बसने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।
आज पीने को पानी नही मयस्सर तश्नगी बुझाने के लिए,
बंजर जमीन पर बाग लगाने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।
वक्त बदल रहा है हल्के बर्तनों में ज्यादा आवाज आने लगी है,
सारे फूल एक गुलदस्ते में सजी रहे ख्वाहिश मेरी आज भी है।
नशा कुछ और है कुँज ए शख्सियत में पैमाने मय से हटकर,
जमाने की हलक में मय न उतरे ख्वाहिश मेरी आज भी है।
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