Sunday, 12 November 2017

सुघ्घर अकती के तिहार

चलौ  संगी  जुरमिल  मनालन
सुघ्घर  अकती  के  तिहार
दाईं  दीदी मन  करलौ तुमन
करसी  अउ  चुकिया  ल  तइयार
थोरकुन  चाउंर  संग  म
चना  अउ  उरिद  के  दार
चढा  लेथन  आमा  बर  पिपर
गांव के  देवी-देवता  म  जलधार
कहाँ  पाबे  संगी  छत्तीसगढ़ी कस
गुरतुर  भाखा  मया  अउ  दुलार....... ।।
रामनवमी के  लगीन  धराय
अकती  ह  आगय  भांवर  पराही
सरई  सैगोना के  मडवा  सजाए
दुवारी म  पर्रा अउ बेंदरा  बंधाए
दूल्हा- दुल्हिन के  मन  गदराए
बरात  जवइया  मन  मटमटाए
ताल  म  गडवा  बाजा  बजाए
बरात  परघाय  मउर  सउपाय
टिहिर टिहिर सुघ्घर मोहरी के घुन
दुल्हिन बिदा बर  होगय  तइयार
कहाँ पाबे संगी छत्तीसगढ़ी कस
गुरतुर भाखा मया अउ दुलार......... ।।
खेती किसानी के  बुता  बाढ़गे
काँटा  खूँटी  बिने बर  होजा  तइयार
महिनत  करय जम्मो  संगवारी
छिहिल  छिहिल  दिखय  खेत - खार
अबके  बछर  जे  बरसय  बदरिया
हो जय  संगी  हमरो  बेडा  पार
आ ना  पेजयारीन  भूख  म झन  मार
बासी  पेज  पताल  चटनी  ल उतार
कहाँ पाबे संगी छत्तीसगढ़ी कस
गुरतुर भाखा मया अउ दुलार....... ।।
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           ***** कुँज  साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
               ०३ //११//२०१७
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