Saturday, 11 November 2017

शायरी

              *****शायरी*****
गुलशन गुलिश्तां की सदियों तक यूँ ही  संवरती  रहे,
वादियों में  अमन के फूल यूँ ही  महकती  रहे।
आपकी  और  हमारी  मुलाकातों  की  दौर चलती  रहे,
बातों ही बातों में दोस्तों महफिल हमारी सजती रहे।।
                      *******
शुभंकरों में हल्दी  रोली  गंध व चंदन है,
चंदनों में भी खास पितांबरी का वंदन है।  सज गई आपके चाहने से सुंदर महफिल,
खुशनुमा माहौल में आप  सभी का हार्दिक  अभिनंदन  है।।
                     ********
सुहागन के माथे पर सिंदूरी लाली चाहिए,
सुमन के महकने के लिए फुलवारी चाहिए
महफिल  को  सजते  देर  न  लगेगी  यारों
आप लोगों के चेहरे पर मुस्कान व हाथों की ताली  चाहिए।।
                    ********
दोस्ती  ऐसे करो कि धड़कन में बस जाए
सांस भी लो तो  खुशबु उसी के  आए।
दोस्ती का नशा दिल में  ऐसे छा जाए,
बात कुछ भी हो पर याद दोस्त की आए।।
                   ********
दोस्ती  गजल है गुनगुनाने के लिए,
दोस्ती नगमा है सुनाने के लिए।
ये वो जज्बा है जो सबको नहीं मिलता,
क्योंकि हौसला चाहिए दोस्ती को निभाने के लिए।।
                     ********
मुकद्दर  ने इतनी  सी जिन्दगी में,
मुझे  बहुत  कुछ  नवाजा है।
जो नयमतें मुझे  मिलना  था,
हरेक  उपहार  से  सजाया है।
गिला  करें तो  किस बात का  कुँज,
वो तो माँगने से पहले सब कुछ दे डाला है
                     **********
बहुत  आसान है  जमीं पर,
           आलीशान मकान  बना लेना।
मुश्किल है लेकिन दोस्तों,
          किसी के दिल में जगह बना पाना।
                 ************
मुझे किसी  शिखर पर  पहुंच कर नाम  की  चाहत  नहीं।
मेरी  मर्ज ए काया  ने  इतना शोहरत  जो  बख्शा  है।।
                    ***********
मुझे डर  अंजाम  से  नहीं,
                  बल्कि उम्मीद से लगता है।
जो  मेरे  अपने  मेरे  आने की,
                   दिल से  लगाए  बैठे हैं।।
                   ************
मशगूल थे हम कुछ  इस कदर  अपने में,
जीते रहे हम बेखबर बेखौफ  सपने में।
हकीकत तब हुई बयां जब नींद से जागे,
जागे तो क्या लुटा चुके थे जिन्दगी सपनेमे
                    ***********
जिन्दगी जिन्दगी की हर वक्त  तलाश में,
हर पल  मिलती है  बस  यही आश में।
कुछ  तो लिखा होगा वो  भी मेरे भाग में,
मैं क्या जानूँ जिन्दगी पहुँच गई मंजिल में,
जिसे आगाज समझा पहुँच गयाअंजाम में
                    *********
चाँद अधूरा है चाँदनी  के बिना,
          बिजली अधूरी है दामिनी के बिना।
बसंत  अधूरा है बहारों के  बिना,
          यारी  अधूरा है यारों के  बिना।।
                    ***********
चमन ए अमन बसने के लिए बस्तीचाहिए
दरिया को पार करने के लिए कश्तीचाहिए
शोहरतें जहाँ के लिए माकूल हस्ति चाहिए
मुस्कुराना हो ताउम्र तो दोस्तों की  दोस्ती चाहिए।।
                 ************
           ***** कुँज  साहू *****
                   (शिक्षक  पं.)
######################




*****सर्वाधिकार  सुरक्षित है *****

No comments:

Post a Comment