Saturday, 11 November 2017

यादें..

               ****  यादें ****
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दिल की  चाहत है कि दिल के सामने सदा ही दिलकश नजारा रहे।
ये दिल कभी संजीदा न रहे  चाहूँ  ये हर वक्त आवारा रहे।।
संजीदगी सादगी से इंकार नहीं पर  बंधन  सा अहसास होता है।
मैं  मानता हूं दिल के दीवानापन में दीवानगी खास होता है।।
मोहब्बत का मजा वो हरगिज नहीं ले पाते हैं  यारों।
जिनका दिल वक्त  बेवक्त  किसी की  यादों में उदास होता है।।
तो क्या जिन्दगी में यादों का कोई अहमियत नहीं होता है।
यादें क्या हमारे जहन में एक फजीहत होता है।।
फजीहत नाम देकर यूँ ही यादों को बदनाम न  कर।
यादें  तो  मोहब्बत की ईबाबत करने का राज  होता है।।
गर उदास हो  मन  तो  हमें  कोई  साथ  नहीं  देता है।
भरी  महफिल में सब  तन्हा  व  नागवार गुजरता है।।
तब  यादों के साऐं में  चर्चा दिल ए आम कर  देख  लेना।
क्योंकि तन्हाई में भी  यादें हौसला  बुलंद कर  महफिल  का  अहसास  देता है।।
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             *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
                ०१//११//२०१७
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*****सर्वाधिकार  सुरक्षित है *****

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