*** संभव नहीं दिल से भूला पाना ***
याद आया आज वो बचपन
जब चंचल होता था अपना मन
कितनी प्यारी - प्यारी लगती थी
कितनी न्यारी - न्यारी लगती थी
दादा - दादी और नाना-नानी
जो हमको सुनाती थीं सुंदर
किस्से और प्यारी कहानी
छोटी सी खुशीयों में हँसना
छोटी-छोटी जिद में रो देना
वो पापा का गुस्से से देखना,
डर से कांपकर सिमट जाना,
तब माँ को देखकर आती सामने
सिसकियाँ लेते आँसू पोछना
माँ के गोद में सिमट जाना,
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच कहता हूँ वो बचपन की यादों को संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।
स्कूलों के दिनों में
सुबह-सुबह में तैयार हो जाना
वो कलम को घीस कर
उसमें धारदार नोंक बनाना
परचून की दुकान पर जाकर
पच्चीस पैसे का अखबार ले आना
नए कापी पुस्तक में जिल्द चढ़ाना
अपनें नाम को रंगों से सजाना,
शिक्षक दे गर शाबाशी तो
सारे सहपाठियों को बताना,
सवाल का जवाब गलत हो जाए तो
कापी बस्ते में डाल दुबककर बैठ जाना
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच कहता हूँ वो बचपन की यादों को संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।
याद है मुझे आज भी,
वो डी. डी. वन का जमाना
फिल्म धारावाहिक देखने के लिए,
घंटों झिलमिलाते टी.वी. के सामने
बार- बार उल्टी सीधी गिनती गिनकर,
इंतजार के समय को बिताना,
छोटी - छोटी बातों में झगड़कर,
संगी - साथी से खी हो जाना,
कुछेक घंटे गुजर जाने के बाद
फिर आपस में हंसते हुए मिल जाना
वो काँच के कन्चों की जीत हार
गुल्ली डंडा के खेल में फेर फिराना,
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच कहता हूँ वो बचपन की यादों को संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।
करके गुस्ताखी अंजान बने रहना
फिर पड़े डाँट तो उलझन में पड़ना
ना कोई गम, ना कोई डर होना
बस खेल-खिलौनों का फिक़र होना
दिल में कोई कपट न जलन होना,
मन का सब तरह निशंक रहना
बस अपने ही धुनों में खोया रहना
अब जीवन के लिए संभव नहीं
उस सुनहरे अतीत में लौट पाना
माँगू वरदान ऐ भगवान गर तुमसे तो
कर दया मुझ पर उपकार ये करना
फिर से मेरा वो प्यारा बचपन मुझको,
मेरे यादों संग सूत समेत लौटा जाना
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच कहता हूँ वो बचपन की यादों को संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।
######################
*****कुँज साहू *****
(शिक्षक पं.)
१४//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
याद आया आज वो बचपन
जब चंचल होता था अपना मन
कितनी प्यारी - प्यारी लगती थी
कितनी न्यारी - न्यारी लगती थी
दादा - दादी और नाना-नानी
जो हमको सुनाती थीं सुंदर
किस्से और प्यारी कहानी
छोटी सी खुशीयों में हँसना
छोटी-छोटी जिद में रो देना
वो पापा का गुस्से से देखना,
डर से कांपकर सिमट जाना,
तब माँ को देखकर आती सामने
सिसकियाँ लेते आँसू पोछना
माँ के गोद में सिमट जाना,
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच कहता हूँ वो बचपन की यादों को संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।
स्कूलों के दिनों में
सुबह-सुबह में तैयार हो जाना
वो कलम को घीस कर
उसमें धारदार नोंक बनाना
परचून की दुकान पर जाकर
पच्चीस पैसे का अखबार ले आना
नए कापी पुस्तक में जिल्द चढ़ाना
अपनें नाम को रंगों से सजाना,
शिक्षक दे गर शाबाशी तो
सारे सहपाठियों को बताना,
सवाल का जवाब गलत हो जाए तो
कापी बस्ते में डाल दुबककर बैठ जाना
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच कहता हूँ वो बचपन की यादों को संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।
याद है मुझे आज भी,
वो डी. डी. वन का जमाना
फिल्म धारावाहिक देखने के लिए,
घंटों झिलमिलाते टी.वी. के सामने
बार- बार उल्टी सीधी गिनती गिनकर,
इंतजार के समय को बिताना,
छोटी - छोटी बातों में झगड़कर,
संगी - साथी से खी हो जाना,
कुछेक घंटे गुजर जाने के बाद
फिर आपस में हंसते हुए मिल जाना
वो काँच के कन्चों की जीत हार
गुल्ली डंडा के खेल में फेर फिराना,
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच कहता हूँ वो बचपन की यादों को संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।
करके गुस्ताखी अंजान बने रहना
फिर पड़े डाँट तो उलझन में पड़ना
ना कोई गम, ना कोई डर होना
बस खेल-खिलौनों का फिक़र होना
दिल में कोई कपट न जलन होना,
मन का सब तरह निशंक रहना
बस अपने ही धुनों में खोया रहना
अब जीवन के लिए संभव नहीं
उस सुनहरे अतीत में लौट पाना
माँगू वरदान ऐ भगवान गर तुमसे तो
कर दया मुझ पर उपकार ये करना
फिर से मेरा वो प्यारा बचपन मुझको,
मेरे यादों संग सूत समेत लौटा जाना
जिंदगी का वो सबसे हसीन पल था
सच कहता हूँ वो बचपन की यादों को संभव नहीं दिल से भूला पाना......... ।
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*****कुँज साहू *****
(शिक्षक पं.)
१४//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
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