Wednesday, 15 November 2017

कोई दूसरा मिल जाएगा....

 चिड़िया का  इक  नीड़ उजड़ गया तो क्या  दूसरा संवर जाएगा,
मैं नहीं मुकद्दर में तेरा  तो क्या तुझे कोई दूसरा मिल जाएगा।
फिरता  रहता हूँ  फिजाओं में बहारों के बादल बनकर संग  संग,
ढूँढता हूँ नीले आसमां से शायद मुझे मेरे मंजिल का पता मिल जाएगा।
कभी  तो  मेहरबान  होगा  खुदा  जरूर तरस खाकर  मुझपर,
तब तेरी  इकरार ए मोहब्बत होगी व  दिल का दर भी खुल जाएगा।
फिर तुम्हारी निगाहों  व यादों में बस एक ही चेहरा छा जाएगा,
तमन्ना होगी  मुझसे  मिलने की तो  दिल  तड़पेगा तुझे रुलाएगा।
कैसे रोक पाओगी छलकती अश्कों की  धारा को आँखों में आने से,
ये तो पानी है जोअपने बहने के लिए खुद ही रास्ता बना  जाएगा।
ये अश्कों की धारा मुझे तेरी गलियों में आने की वजह दे जाएगा,
यकीं हैं मुझे मेरे प्यार पर तब तेरे घर का दरवाजा खुला मिल जाएगा।
नशेमन इश्क में उनकी गलियों में रोज जाना फितरत सा हो जाएगा,
कि चेहरा चाँद सा प्रियतम का बाहर इंतजार में  झाँकता मिल जाएगा।
यूँ ही देखते - देखते परवान इश्क का  इस कदर  चढ़  जाएगा,
दीदार ए यार बगैर शुकुन न तेरे दिल  न कुँज के दिल को आएगा।
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            *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
               १३//११ //२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****

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