स्नेह से जिनका जीवन संवरा,
अप्रतिम प्रेम की मूरत है वो।
मंदिर दरगाहों में दस्तक दे दे,
मन्नतें जो मांगे वंदन हैं वो।।
हर राहों में पकड़ बाँहों को,
मुझ राही का पथ प्रदर्शक है वो।
आशिर्वाद से सिंचन करता जो,
मुझ तृण को श्यामल मेघ है वो।।
उस परम् से इस धरा पर,
अवतरित ईश का स्वरूप है वो।
जीवन में तम को हर ले जो,
उद्दीपित प्रकाशपुण्य पूँज है वो।।
जो आऐ विपदा ग्रस्ने को मुझे,
अभेद्य मृत्युंजय सा ढ़ाल है वो।
निर्णय लूँ गर जीवन में कोई,
तर्क दे विश्वास पूर्ण समर्धक है वो।।
उस जीवंत देवत्व तत्व का,
है अभिमान कि अश्क हूँ मैं।
यह जीवन क्या हर जीवन में,
मेरा पिता हो वो पुत्र कुँज रहूँ मैं।।
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*****कुँज साहू *****
(शिक्षक)
१८//०६//२०१७
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
अप्रतिम प्रेम की मूरत है वो।
मंदिर दरगाहों में दस्तक दे दे,
मन्नतें जो मांगे वंदन हैं वो।।
हर राहों में पकड़ बाँहों को,
मुझ राही का पथ प्रदर्शक है वो।
आशिर्वाद से सिंचन करता जो,
मुझ तृण को श्यामल मेघ है वो।।
उस परम् से इस धरा पर,
अवतरित ईश का स्वरूप है वो।
जीवन में तम को हर ले जो,
उद्दीपित प्रकाशपुण्य पूँज है वो।।
जो आऐ विपदा ग्रस्ने को मुझे,
अभेद्य मृत्युंजय सा ढ़ाल है वो।
निर्णय लूँ गर जीवन में कोई,
तर्क दे विश्वास पूर्ण समर्धक है वो।।
उस जीवंत देवत्व तत्व का,
है अभिमान कि अश्क हूँ मैं।
यह जीवन क्या हर जीवन में,
मेरा पिता हो वो पुत्र कुँज रहूँ मैं।।
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*****कुँज साहू *****
(शिक्षक)
१८//०६//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
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