मेरी फिक्र अब न जाने कैसे आदत में बदल रही है
शायद यारों मेरी तबीयत थोड़ी थोड़ी संभल रही है
जो सिहरन व उलझन है जीवन में दुख झेल लेने का
वो अब धीरे-धीरे जीवन के तजुर्बे में बदल रही है
लिखा था मेरे जीवन में पुरे एक बछर का वनवास रे साथी
दौरान ए वनवास मेरी जिंदगी एक बार फिर से संवर रही है
बिखर गए थे अरमां सारे उजड़ चुके थे मेरे ख्वाबों का नीड़
देखो मेरे राम के रहमों - करम से एक बार फिर से संवर रही है
देख के मेरे अपनों की दुवाऐं स्नेह प्यार और दुलार
जीवन पथ की दुश्वारियां भी अपने में ही सिमट रही है
फिर जाऊँगा उन्हीं गांव घर खेत खलिहान और मदरसों में
ये सोच - सोच दिल ए नादान मस्त - मस्ती में मचल रही है
होगी यारों से यारी की बातें जब बैठेंगे यारों के संग
सोच हृदय हर्षित हो अपना धड़कन की कंपन बदल रही है
किस्मत के तारों से गर्दिशों के बादल बिखर गई हैं
दिल के नाद से अल्हादित् हो नयन ये मेरे झर - झर बरस रही है
मैं छत्तीसगढ़िया छत्तीसगढ़ के आँगन में पला बढा हूँ
जान बूझकर कह न रहा हूँ जूबां ए कुँज जज्बात छलक रही है।।
ॐॐॐ ॐॐॐ ॐॐॐ ॐॐॐ ॐॐ
****** कुँज साहू ******
( शिक्षक पं. )
{{ १ /११/२०१७}}
###################
****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
शायद यारों मेरी तबीयत थोड़ी थोड़ी संभल रही है
जो सिहरन व उलझन है जीवन में दुख झेल लेने का
वो अब धीरे-धीरे जीवन के तजुर्बे में बदल रही है
लिखा था मेरे जीवन में पुरे एक बछर का वनवास रे साथी
दौरान ए वनवास मेरी जिंदगी एक बार फिर से संवर रही है
बिखर गए थे अरमां सारे उजड़ चुके थे मेरे ख्वाबों का नीड़
देखो मेरे राम के रहमों - करम से एक बार फिर से संवर रही है
देख के मेरे अपनों की दुवाऐं स्नेह प्यार और दुलार
जीवन पथ की दुश्वारियां भी अपने में ही सिमट रही है
फिर जाऊँगा उन्हीं गांव घर खेत खलिहान और मदरसों में
ये सोच - सोच दिल ए नादान मस्त - मस्ती में मचल रही है
होगी यारों से यारी की बातें जब बैठेंगे यारों के संग
सोच हृदय हर्षित हो अपना धड़कन की कंपन बदल रही है
किस्मत के तारों से गर्दिशों के बादल बिखर गई हैं
दिल के नाद से अल्हादित् हो नयन ये मेरे झर - झर बरस रही है
मैं छत्तीसगढ़िया छत्तीसगढ़ के आँगन में पला बढा हूँ
जान बूझकर कह न रहा हूँ जूबां ए कुँज जज्बात छलक रही है।।
ॐॐॐ ॐॐॐ ॐॐॐ ॐॐॐ ॐॐ
****** कुँज साहू ******
( शिक्षक पं. )
{{ १ /११/२०१७}}
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
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