मैं जब भी याद करता हूँ,
अपने गाँव को,
मुझे वो मनभावन बस्ती,
मेरे शाला के सामने की गश्ती,
याद आती है।
वो बेल के पेड़ों का रवार,
गाँव के बीच लगा सुंदर,
बजरंगी का दरबार,
याद आती है।
गौरी गौरा चौक में,
जब माताऐं और बहनें,
होम दीप धूपबत्ती जलाकर,
गलियों को महकाती है,
मुझे वो हर लम्हा याद आती है।
शीतला माता के मंदिर में,
बड़े बुजुर्गों बच्चों के संग,
सुंदर जसगीत व ताल में,
ज्योत जवांरा लहराती है,
मुझे वह हर लम्हा याद आती है।
सरोवर तट पर कबीर कुटी से,
शंखनाद व घंटों के संग,
दोहे साखी और कुण्डलियां,
मधुर आरती गाई जाती है,
मुझे वह हर लम्हा याद आती है।
रामचरित मानस की गाथा,
बड़े बुजुर्गों बच्चों के संग,
हर सप्ताह सरस संगीत में,
भजनों पर गाई जाती है,
मुझे वह हर लम्हा याद आती है।
क्या क्या लिखूं ए कुँज बता,
मेरे मन को सूझ न पाती है,
मुझे वह हर पल हर लम्हा याद आती है।।
######################
*****कुँज साहू *****
(शिक्षक)
२९//०६ //२०१७
#######ॐनम:शिवाय########
****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
अपने गाँव को,
मुझे वो मनभावन बस्ती,
मेरे शाला के सामने की गश्ती,
याद आती है।
वो बेल के पेड़ों का रवार,
गाँव के बीच लगा सुंदर,
बजरंगी का दरबार,
याद आती है।
गौरी गौरा चौक में,
जब माताऐं और बहनें,
होम दीप धूपबत्ती जलाकर,
गलियों को महकाती है,
मुझे वो हर लम्हा याद आती है।
शीतला माता के मंदिर में,
बड़े बुजुर्गों बच्चों के संग,
सुंदर जसगीत व ताल में,
ज्योत जवांरा लहराती है,
मुझे वह हर लम्हा याद आती है।
सरोवर तट पर कबीर कुटी से,
शंखनाद व घंटों के संग,
दोहे साखी और कुण्डलियां,
मधुर आरती गाई जाती है,
मुझे वह हर लम्हा याद आती है।
रामचरित मानस की गाथा,
बड़े बुजुर्गों बच्चों के संग,
हर सप्ताह सरस संगीत में,
भजनों पर गाई जाती है,
मुझे वह हर लम्हा याद आती है।
क्या क्या लिखूं ए कुँज बता,
मेरे मन को सूझ न पाती है,
मुझे वह हर पल हर लम्हा याद आती है।।
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*****कुँज साहू *****
(शिक्षक)
२९//०६ //२०१७
#######ॐनम:शिवाय########
****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
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