Monday, 27 November 2017

दिल ए तश्नगी ......

मुलाकात ए रस्म अदायगी को जो तुम मेरे घर आओगे,
आँखें छलका रिश्तेदारों से मिलकर चले जाओगे,
पर तुम्हें पता है मुझे इल्म न होगी इसबात का  जरा भी
क्योंकि ये रस्म मेरे सफर ए मौत के बाद निभाओगे
इसलिये राह ए जिन्दगी दिले  अरमान है ये मेरी,
तो क्यों न मुझसे तत्काल मुलाकात को चले आते,

मेरी बड़ी- बड़ी गुस्ताखियाँ अनदेखा कर जाओगे
गुनाह ए अजीम  तुम दिल से माफ कर जाओगे ,
यकीन मानिए मुझे बा इज्जत बरी कर जाओगे,
क्योंकि ये रस्म मेरे सफर ए मौत के बाद निभाओगे,
इसलिये राह ए जिन्दगी दिले ख्वाहिश है ये मेरी,
तो क्यों न मुझको जीते जी तुम माफ कर जाते,

हर महफिल में मेरे नाम के तुम नज्में जो सुनाओगे,
अपने दोस्तों से मिलकर मेरी शराफत को जताओगे,
काश गुजार पाते कुछ पल मेरे संग सोच पछताओगे,
क्योंकि ये रस्म मेरे सफर ए मौत के बाद निभाओगे,
इसलिये राह ए जिन्दगी दिले तमन्ना है ये मेरी,
तो क्यों न जीते जी हम मिलकर महफिल सजा जाते,

मेरे हरेक हुनर व फन की तुम तारीफ कर जाओगे,
गुजरे हर पल की एक एक दास्तान सुना जाओगे,
तब तक यारों रिश्ते निभाने में बडी देर कर जाओगे,
क्योंकि ये रस्म मेरे सफर ए मौत के बाद निभाओगे,
इसलिये राह ए जिन्दगी दिले मुराद है ये मेरी,
तो क्यों न इंतजार किए बगैर रिश्ते का दस्तूर निभा जाते,

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   🖋️🖋️  *****कुँज साहू *****🖋️🖋️
                    (शिक्षक पं.)
                २२//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
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