कभी बसंत के बसंती बहार ए चमन तो,
कभी पतझड़ के पर्णपाती वन बन जातीहै।
कभी सावन की रिमझिम बरसात तो,
कभीअनायास वृष्टिछाया क्षेत्र बन जातीहै।
ये जिंदगी हर वक्त अजीब रंग दिखाती है.....।।
शरद की दूधिया चांदनी सी दमकती है,
तो कभीअमावश की काली रात लगती है।
फागुनी रंग गुलााल की फुहार सी उड़ती है,
तो कभी ग्रीष्म की प्रचंड दिनोंसी लगती है।
ये जिंदगी हर वक्त अजीब रंग दिखाती है.....।।
गर नादानी नासमझी से निभाओ तो,
रंजो गम व झमेला बन रह जाती है।
तजुर्बे व शिद्दत से गुजारो गर इसे तो,
प्रतिपल हसीन यादों का मेला बन जातीहै।
ये जिंदगी हर वक्त अजीब रंग दिखाती है.....।।
हर वारदात में नई सीख सीखा जाती है,
अज्ञानी कोअनुभव से ज्ञानवान बनाती है।
जाने कब लड़कपन में समझदारी लाती है,
राह के पत्थर को बहुमूल्य हीरा बनाती है।
ये जिंदगी हर वक्तअजीब रंग दिखाती है......।।
दुनिया जीत हार के फेरे में पड़ जाती है,
मान अपमान के भंवर में फंस जाती है।
द्वेष-ईर्ष्या की भावना मन में पाल जाती है,
प्रेमसद्भाव से भला क्यों रह नहीं पाती है?
ये जिंदगी हर वक्तअजीब रंग दिखाती है....।।
हर रिश्ताअपनीअलग भूमिका निभाती है,
रिश्तों का तानाबाना सरस हो मुस्कुराती है।
गर कहीं गाँठ पड़ जाए तो दर्द बन जातीहै,
संबंधों में मेल होतो घर जन्नत बन जाती है।
ये जिंदगी हर वक्त अजीब रंग दिखाती है.....।।
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*****कुँज साहू *****
(शिक्षक पं.)
११//११//२०१७
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ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
कभी पतझड़ के पर्णपाती वन बन जातीहै।
कभी सावन की रिमझिम बरसात तो,
कभीअनायास वृष्टिछाया क्षेत्र बन जातीहै।
ये जिंदगी हर वक्त अजीब रंग दिखाती है.....।।
शरद की दूधिया चांदनी सी दमकती है,
तो कभीअमावश की काली रात लगती है।
फागुनी रंग गुलााल की फुहार सी उड़ती है,
तो कभी ग्रीष्म की प्रचंड दिनोंसी लगती है।
ये जिंदगी हर वक्त अजीब रंग दिखाती है.....।।
गर नादानी नासमझी से निभाओ तो,
रंजो गम व झमेला बन रह जाती है।
तजुर्बे व शिद्दत से गुजारो गर इसे तो,
प्रतिपल हसीन यादों का मेला बन जातीहै।
ये जिंदगी हर वक्त अजीब रंग दिखाती है.....।।
हर वारदात में नई सीख सीखा जाती है,
अज्ञानी कोअनुभव से ज्ञानवान बनाती है।
जाने कब लड़कपन में समझदारी लाती है,
राह के पत्थर को बहुमूल्य हीरा बनाती है।
ये जिंदगी हर वक्तअजीब रंग दिखाती है......।।
दुनिया जीत हार के फेरे में पड़ जाती है,
मान अपमान के भंवर में फंस जाती है।
द्वेष-ईर्ष्या की भावना मन में पाल जाती है,
प्रेमसद्भाव से भला क्यों रह नहीं पाती है?
ये जिंदगी हर वक्तअजीब रंग दिखाती है....।।
हर रिश्ताअपनीअलग भूमिका निभाती है,
रिश्तों का तानाबाना सरस हो मुस्कुराती है।
गर कहीं गाँठ पड़ जाए तो दर्द बन जातीहै,
संबंधों में मेल होतो घर जन्नत बन जाती है।
ये जिंदगी हर वक्त अजीब रंग दिखाती है.....।।
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*****कुँज साहू *****
(शिक्षक पं.)
११//११//२०१७
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