Tuesday, 14 November 2017

दिल संभल जाए.....

हमें दिल के करीब इतना ही रक्खो कि दिल सँभल जाए,
इस क़दर भी  दीवानगी सेे न चाहो कि दम निकल जाए।।
मिले हैं यूँ तो बहुत पर रूह ए रूमानियत भी मिल जाए,
होंठों को छूकर रूह गर्मी-ए-अनफ़ास से पिघल जाए।।
मोहब्बत मेंअजीब है माली - हालात दिलों की धड़कन का,
इस दिल का  क्या एतबार जाने कौन कहाँ रास्ता बदल जाए।।
देर न कर इजहारे इश्क में कि उम्र जो ख़्वाब में गुजर जाए,
हर तमन्ना ए मोहब्बत यहीं दिले हसरत बनकर रह जाए।।
यूँ तो होता नहीं नसीब मेहरबां सबों कि ख्वाहिश पूरी हो जाए,
लेकिन हो न दिलों संग ये गुश्ताखी कि इश्क यादों के सायें में खो जाए।।
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             *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
                १२//११//२०१७
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