Thursday, 16 November 2017

नवंबर बीस आगाज है इंकलाब का

नवंबर बीस आगाज है इंकलाब का,
आज हमें नारा बुलंद कर जाना है।
अपने-अपने हिस्से का फर्ज,
हम सबको अदा कर जाना है।।

अब की बार  कोई फरियाद नहीं,
जंग ए जयघोष से हक को पाना है।
हर शिक्षक आज आंदोलित है,
सारे महकमे को ये संदेश दे जाना है।।

शिक्षक गर दृढ़ संकल्प करे तो,
असंभव भी संभव बन जाता है।
शिक्षक के दिशा-निर्देशन से तो,
शठ सुधर कर ज्ञानी बन जाता है।।

इतिहास गवाह इस बात का है,
क्यों लोग चाणक्य को भूल जाते हैं।
साधारण बालक चंद्र गुप्त जैसों को,
भारतवर्ष का अजय सम्राट बनाते हैं।।

आज सत्ता के नशे में चूर घनानंद(वर्तमान सरकार) को,
शिक्षक की परेशानी समझ नहीं आती है।
शायद झूठ- मुठ आश्वासन दे - दे कर,
निर्लज्ज को गुरू से मसखरी सुहाती है।।

शिक्षक जो लगता सरल साधारण,
लेकिन सरल साधारण नहीं होता है।
जो हो जाए दृढ़ संकल्पित शिक्षक तो,
जग में परिवर्तन असाधारण करता है।।

अब जब ऐसा अवसर आन पड़ा तो,
एक मुठ्ठी बन सुसंगठीत हो जाना है।
हर  मुसीबत से  लड़ने  को साथियों,
सबको  मिलकर  दमखम दिखाना है।।

हरेक जर्रे -जर्रे में संदेश भिजवा दो,
शिक्षक के क्रान्ति से सैलाब आना है।
अपनी सारी जायज माँगें पूरी करवाने को,
हर शिक्षक ने अब आर-पार का ठाना है।।

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             *****कुँज साहू *****
                    (शिक्षक पं.)
               १६//११//२०१७
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