आजादी की फिर से चिराग जलाने की बारी है,
मेरे वतन की राहों में भरी पड़ी दुश्वारी है।
कहीं गरीबों की सिसकियाँ तो कहीं बिमारी है,
बाढ़ से बर्बादी तो किसानों की लाचारी है।
मंहगाई है पांव पसारती कम होती खुद्दारी है,
धनवान के मन में धन के लिए भरी मक्कारी है।
कर्मचारी और अधिकारी देखो भ्रष्टाचारी है,
जनता ने चुना जिसे उन्में भरी हुई गद्दारी है।
क्या क्या लिखूं मैं दोस्तों युवाओं में हर तरफ बेगारी है,
समाज के हर तबके में मौज उड़ाते दुराचारी हैं।
इसलिए तो कहता है कुँज कहाँ मिली पूरी आजादी है,
*****कुँज साहू *****
(शिक्षक पं.)
१५//०८ //२०१७
**"***"***"***"***"***"***"***"**
मेरे वतन की राहों में भरी पड़ी दुश्वारी है।
कहीं गरीबों की सिसकियाँ तो कहीं बिमारी है,
बाढ़ से बर्बादी तो किसानों की लाचारी है।
मंहगाई है पांव पसारती कम होती खुद्दारी है,
धनवान के मन में धन के लिए भरी मक्कारी है।
कर्मचारी और अधिकारी देखो भ्रष्टाचारी है,
जनता ने चुना जिसे उन्में भरी हुई गद्दारी है।
क्या क्या लिखूं मैं दोस्तों युवाओं में हर तरफ बेगारी है,
समाज के हर तबके में मौज उड़ाते दुराचारी हैं।
इसलिए तो कहता है कुँज कहाँ मिली पूरी आजादी है,
एक बार फिर करनी होगी आजादी के जंग की तैयारी है।
######################*****कुँज साहू *****
(शिक्षक पं.)
१५//०८ //२०१७
**"***"***"***"***"***"***"***"**
****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
No comments:
Post a Comment