जीवन पथ पर तुम जरा संभल जाना,
प्रतिपल - प्रतिक्षण तुम सदा मुस्कुराना।
छोटे- छोटे तकरार में यूँ न रूठ जाना,
लेकिन अपनों से यूँ रुसवा हो जाना अच्छी बात नहीं..........//१//
कभी अति- हर्षित हो उल्लासित रहना,
जुबां ए लबों से जरा संभल कर कहना।
वादा किया तो वादा ए वचन निभाना,
लेकिन वादा करके यूँ मुकर जाना अच्छी बात नहीं...... //२//
सफर ए जिन्दगी दुश्वारियाँ बहुत है,
हो जाती अक्सर नादानियाँ बहुत है।
नादानी को तुम समझदारी में बदलना,
लेकिन इंसान में इंसानियत का न होना अच्छी बात नहीं........ //३//
संग अपनों के अपनेपन से ही रहना,
कभी तुम यारों की याराना न परखना।
विश्वास तोड़ कर तुम सितमगर न होना,
लेकिन यारों से यूँ खफा हो जाना अच्छी बात नहीं......... //४//
बेबस लाचार पर हरदम रहमत दर्शाना,
कमजोरों का हाथ बढ़ाकर देना सहारा।
जोश में चलना कदमों से कदम मिलाना,
लेकिन गरीब मजलुमों पर तेवर दिखाना अच्छी बात नहीं......... //५//
संभाले खुद्दारी का यश वैभव रखना,
विपत पड़े पर तुम टूटना न झुकना।
आए बाधाऐं मंजिल के राहों में न रूकना,
लेकिन सर झुका कर गैरत को बेचना अच्छी बात नहीं........ ..//६//
मानव हो मानवता जीवन में सदा रखना,
दानव बनकर जीनें की कोशिश न करना।
बरखा जल- सम मधुकर सरस बरसना,
लेकिन काले घन- सम गरजकर रह जाना अच्छी बात नहीं.......... //७//
######################
*****कुँज साहू *****
(शिक्षक पं.)
०२//११//२०१७
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
*****सर्वाधिकार सुरक्षित है *****
प्रतिपल - प्रतिक्षण तुम सदा मुस्कुराना।
छोटे- छोटे तकरार में यूँ न रूठ जाना,
लेकिन अपनों से यूँ रुसवा हो जाना अच्छी बात नहीं..........//१//
कभी अति- हर्षित हो उल्लासित रहना,
जुबां ए लबों से जरा संभल कर कहना।
वादा किया तो वादा ए वचन निभाना,
लेकिन वादा करके यूँ मुकर जाना अच्छी बात नहीं...... //२//
सफर ए जिन्दगी दुश्वारियाँ बहुत है,
हो जाती अक्सर नादानियाँ बहुत है।
नादानी को तुम समझदारी में बदलना,
लेकिन इंसान में इंसानियत का न होना अच्छी बात नहीं........ //३//
संग अपनों के अपनेपन से ही रहना,
कभी तुम यारों की याराना न परखना।
विश्वास तोड़ कर तुम सितमगर न होना,
लेकिन यारों से यूँ खफा हो जाना अच्छी बात नहीं......... //४//
बेबस लाचार पर हरदम रहमत दर्शाना,
कमजोरों का हाथ बढ़ाकर देना सहारा।
जोश में चलना कदमों से कदम मिलाना,
लेकिन गरीब मजलुमों पर तेवर दिखाना अच्छी बात नहीं......... //५//
संभाले खुद्दारी का यश वैभव रखना,
विपत पड़े पर तुम टूटना न झुकना।
आए बाधाऐं मंजिल के राहों में न रूकना,
लेकिन सर झुका कर गैरत को बेचना अच्छी बात नहीं........ ..//६//
मानव हो मानवता जीवन में सदा रखना,
दानव बनकर जीनें की कोशिश न करना।
बरखा जल- सम मधुकर सरस बरसना,
लेकिन काले घन- सम गरजकर रह जाना अच्छी बात नहीं.......... //७//
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*****कुँज साहू *****
(शिक्षक पं.)
०२//११//२०१७
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