Tuesday, 14 November 2017

फुर्सत नहीं है मुझे......

मैं अपने  में  इस  कदर  खोया रहता हूँ।
कि  किसी आमो-खास की  चर्चा  करुँ।।
किसी के निंदा व तारीफ के पूलिंदे बांधु।
सच है कि  इतनी  फुर्सत नहीं है  मुझे।।
लोग  न  जाने  कैसे  बगलें  झाँककर यूँ।
पराये तो क्या फभकियाँ अपनों पर भी।।
उतार दिया  करते हैं ये  देख हैरान दिल। तसल्ली दे खुद को कि फुर्सत नहीं मुझे।।
जो जख्म दिखाए अपने अपना जान कर।
कि कोई लगा देगा मरहमअपना मानकर।
नमक की पुडिया लाते देख सकते में दिल
ठीक हूँ कहे खुद को कि फुर्सत नहीं मुझे।
कोई मेहनतकश इंसान  मुकाम पा जाए।
तो दिलएतमन्ना होती है कि जश्न हो जाए।
लेकिन करीबी ही दखल पहुंचाए तो दिल। यकीन दिलाता स्वयं कि फुर्सत नहीं मुझे।
अपनों को कामयाबी कि बुलंदी पर देख।
कुंठित विचाराभिव्यिक्त करते पाएहैं लोग
द्वेष रंजीतभाव से कटाक्ष करते देख दिल।
तु जैसाहैठीक है कुँज कि फुर्सत नहीं तुझे
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       *****कुँज साहू *****
              (शिक्षक पं.)
          २९//१०//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****




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