****शायरी और गजलें ****
( १ )
इश्क जज्बातों की लहरें लेता समंदर है।
जिंदा हैं वे जिनके दिलों में इश्क का मंजर है।।
वरना जिंदा होकर भी नादान शरीर मुर्दा है।
बेशकीमती होकर भी ये जीवन धूल का गर्दा है।।
-----------*****----------
( २ )
इश्क में ज्यादा जज्बाती नहीं हुआ करते।
इश्क ही मंजिल ए मुकाम नहीं हुआ करते।।
जरा सोच हटकर सारे कायनात के बारे
में।
कइयों को मोहब्बत नसीब नहीं हुआ करते।।
---------*****----------
( ३ )
वो इश्क इश्क ही क्या जो बदनाम हो जाए।
वो मोहब्बत मोहब्बत नहीं जो गुमनाम हो जाए।।
आशिक तो वो ही सच्चा है इस जहाँ में यारों।
जो चरागों सा जलकर खुद कुर्बान हो जाए।।
------------*****----------
( ४ )
भंवरा बागों में जाकर कलियों से पराग चुनते हैं।
मदमस्त मस्ति में मयकशी के आलम में घुमते हैं।।
इश्क की मर्ज से घायल हो बन परवाना
फिरते हैं।
तड़पकर मरहम ए इश्क का ठिकाना पूछते हैं।।
रोग इश्क का लगने से पहले कहाँ वो सुनते हैं।
हर दरख्तों में ठहर हकीम ए दवाखाना ढुढ़ते हैं।।
मुलाकात हो उनसे जिसे आशिकी का मारा कहते हैं।
मयखाने में जाम छलका मर्ज ए इश्क का
दवा मानते हैं।।
***,,, ****,,, ***
( ५ )
प्याले में जाम पुराना हो तो मजा देता है।
इश्क का नशा जरा सबसे दूजा होता है।। वफा परस्त हमसफ़र हो तो मजा देता है।
नुँर ए जिन्दगी इसी जँहा में सजा देता है।।
गर रुसवा हो जाए कहीं मोहब्बत यारों। इश्क परवाने को शमां मे जला देता है।।
***,,, *****,,, ***
######$$$$$$######
*****कुँज साहू *****
( शिक्षक पं.)
०१/११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
( १ )
इश्क जज्बातों की लहरें लेता समंदर है।
जिंदा हैं वे जिनके दिलों में इश्क का मंजर है।।
वरना जिंदा होकर भी नादान शरीर मुर्दा है।
बेशकीमती होकर भी ये जीवन धूल का गर्दा है।।
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( २ )
इश्क में ज्यादा जज्बाती नहीं हुआ करते।
इश्क ही मंजिल ए मुकाम नहीं हुआ करते।।
जरा सोच हटकर सारे कायनात के बारे
में।
कइयों को मोहब्बत नसीब नहीं हुआ करते।।
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( ३ )
वो इश्क इश्क ही क्या जो बदनाम हो जाए।
वो मोहब्बत मोहब्बत नहीं जो गुमनाम हो जाए।।
आशिक तो वो ही सच्चा है इस जहाँ में यारों।
जो चरागों सा जलकर खुद कुर्बान हो जाए।।
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( ४ )
भंवरा बागों में जाकर कलियों से पराग चुनते हैं।
मदमस्त मस्ति में मयकशी के आलम में घुमते हैं।।
इश्क की मर्ज से घायल हो बन परवाना
फिरते हैं।
तड़पकर मरहम ए इश्क का ठिकाना पूछते हैं।।
रोग इश्क का लगने से पहले कहाँ वो सुनते हैं।
हर दरख्तों में ठहर हकीम ए दवाखाना ढुढ़ते हैं।।
मुलाकात हो उनसे जिसे आशिकी का मारा कहते हैं।
मयखाने में जाम छलका मर्ज ए इश्क का
दवा मानते हैं।।
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( ५ )
प्याले में जाम पुराना हो तो मजा देता है।
इश्क का नशा जरा सबसे दूजा होता है।। वफा परस्त हमसफ़र हो तो मजा देता है।
नुँर ए जिन्दगी इसी जँहा में सजा देता है।।
गर रुसवा हो जाए कहीं मोहब्बत यारों। इश्क परवाने को शमां मे जला देता है।।
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*****कुँज साहू *****
( शिक्षक पं.)
०१/११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
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