कहीं बदनाम न हो जाए
ये मेरा दिल दिल न रहे मयखाने की सुनहरी जाम हो जाए।
चिरागों सी दमकती रहे ये आँखें जब सुबह ढलती शाम हो जाए।।
अजीब उलझन में था ये मेरा दिल कि कहीं जाकर न खो जाए।
कि मेरे दिल का सौदा सरे आम कहीं बीच बाजार न हो जाए।।
फिर भी अहतियात बरतते थे उन गलियों में जानें से।
कि कोई मासूम दिल हमारे नाम से बदनाम न हो जाए।।
जिन्दगी के सफर में इस तरह आवाज़ दो हमको।
मंजिल पा भी जाए और सफर में शाम हो जाए।।
गर्दिश में सितारे हों मेरे दिल के फिर भी ये दिल राग सुनाए।
दिल ए नादान कुँज तेरे ही नाम की गजल गुनगुनाए।।
मुझे मालूम है वो ठौर ठिकाना वो खूबसूरत आशियाना।
फिर भी रुक जा ऐ मेरे दिल कि वो कहीं बदनाम न हो जाए।।
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*****कुँज साहू *****
(शिक्षक पं.)
०१//११//२०१७
ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
ये मेरा दिल दिल न रहे मयखाने की सुनहरी जाम हो जाए।
चिरागों सी दमकती रहे ये आँखें जब सुबह ढलती शाम हो जाए।।
अजीब उलझन में था ये मेरा दिल कि कहीं जाकर न खो जाए।
कि मेरे दिल का सौदा सरे आम कहीं बीच बाजार न हो जाए।।
फिर भी अहतियात बरतते थे उन गलियों में जानें से।
कि कोई मासूम दिल हमारे नाम से बदनाम न हो जाए।।
जिन्दगी के सफर में इस तरह आवाज़ दो हमको।
मंजिल पा भी जाए और सफर में शाम हो जाए।।
गर्दिश में सितारे हों मेरे दिल के फिर भी ये दिल राग सुनाए।
दिल ए नादान कुँज तेरे ही नाम की गजल गुनगुनाए।।
मुझे मालूम है वो ठौर ठिकाना वो खूबसूरत आशियाना।
फिर भी रुक जा ऐ मेरे दिल कि वो कहीं बदनाम न हो जाए।।
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*****कुँज साहू *****
(शिक्षक पं.)
०१//११//२०१७
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