Sunday, 26 November 2017

अहसास ए दोस्ती...

मेरी जिंदगी में गर कोई मुसीबत,
अंजाने में कहीं दस्तक दे जाती है।
मेरे दोस्तों की दुवाऐं छा घटाओं सी,
आषाढ़ मेघ की अहसास कराती है।।

दुश्वारि सफर ए मंजिल की राहों पर,
राह ए रोड़ा बन बैठी मिल जाती है।
तो मेरे मित्रों के हौसला अफजाई से,
खुशी रिमझिम सावन सी बरस जाती है।।

हो जाऊं तन्हा गर जीवन में कभी,
मन हो मायूस उदास रह जाती है।
बन शरद पूर्णिमा का चाँद तब साथी,
दिल हर्षित कर चाँदनी सी चमकाती है।।

ख्वाहिश जो कभी किसी नयमतों की,
मन में गर कोई अरमान जग जाती है।
बन ऋतुराज बसंती  बहार  संगवारी,
सदाबहार खुशियों का मेला लाती है।।

प्रेमरस से भरी मुरली की तान सुरीली,
संगीत के सरगम की राग वो होती है।
कलम ए दवात लिख न सकूँ है वो यारी,  हर मौसम मेंअपनाअहसास करा जाती है

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              *****कुँज साहू *****
                      (शिक्षक पं.)
                  १५//११//२०१७
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****सर्वाधिकार सुरक्षित है ****
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