*****श्रावण मास *****
शिव शंकर के बोल बम नारों संग,
श्रावण मास की आगमन हुईं है।
जहाँ भी देखो धरा की आँचल ,
एक रंग में बस हरी भई है।।
हर हर बम बम की जयकारों संग,
कांवरिया शिव जी के धाम चली है।
न भानू की तपिश रोक सकी है,
न पांव की छाला बाधा बनी है।।
वन उपवन पगडंडी से होकर,
झाड़ झरोखा सरिता को पार कर।
मन में लिए भक्ति की ज्योति,
देखो कांवरिया की झुंड चली है।।
रेवा गंगाजल पंचामृत धारा से,
अभिषेक महादेव की होने लगी है।
सुंदर बेला को देख हो हर्षित,
कारी बदरिया भी बरसन लगी है।।
बरखा के जल से ताल सरोवर,
दामन भर खुशियों से लहरा रही है।
चंचल मन जैसे नव यौवन का,
मानों ये सावन बलखा रही है।।
फूल खिले हैं कनेर मनभावन,
बरगद डाल पर झूले पड़े हैं।
रहचुलिये पर बैठी एक सखी,
औरन को भी बुलावन भेजी है।।
नागपंचमी के उत्सव में देखो ,
कुश्ती कबड्डी की दांव लगी है।
नवयुवक सब ताल जमाकर,
मूछों पर ताव वो दे रहे हैं ।।
श्रावण मास की शोभा निराली,
गांव गांव रामझुले की खुशहाली।
भाव भक्ति और लय तालों में,
मेरे राम जी की स्तुति होने लगी है।।
भाई-बहन का रिश्ता ये पावन,
अटूट बना दे इसे सुंदर श्रावण।
ममता स्नेह की थाल सजाकर,
सौगंध रक्षा की दिलाने चली है।।
अलौकिक दशा देख श्रावण की,
शिवमास की अंतस में छवि बसी है।
हो कृपा महाकाल की मो पर,
कुँज के हृदय की आश यही है।।
#######################################
****कुँज साहू ****
( शिक्षक )
ॐॐॐॐॐॐनम:शिवायॐॐॐॐॐॐ
###########################
*****सर्वाधिकार सुरक्षित है *****
No comments:
Post a Comment