Friday, 1 December 2017

दिल से मसखरी...

वो निगाहें मिला मुस्कराकर खेल इश्क की दांव गुजर गए।
मयखाने का रूख किए बगैर पैमाना हम पर छलका गए।।

नशा इश्क का  इस कदर गहराया दिलो-दिमाग में।
मय मय न रहा मय ए इश्क से मुझसे 'मैं'  छीन गए।

अपनें तो क्या हम खुद को पहचानने से कतराते रह गए।
बेकरार दिल ख्वाहिशों की दुनिया में बेबस रह गए।।

नादां था दिल जो अपनें व जमानें की बात समझने से रह गए।
उस दिल में इश्क ए जूनून है गलतफहमी में हम रह गए।।

हो बावरा बन भंवरा उन यादों की महक में मस्त रह गए।
मदहोश दिल तमन्ना ए इश्क की चाहत में इजहार कर गए।।

इश्क का मंजर इस कदर  तूफान ले आता है दिलों में।
उनका इन्कार ए मोहब्बत  दिले ए नासूर बनकर रह गए।।

मर्ज़ ए इश्क का तमाम जिन्दगी मरहम हम ढूंढते रह गए।
उम्र का तकाज़ा था वो दिल्लगी कर दिल से मसखरी कर गए।।

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    *****✍️KUNJ SAHU*****
                  (TEACHER)
Karesara, S/Lohara, Kabirdham
      (CG), Mb. 9993396300.
                01//12//2017
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