भीड़े दोस्त दोस्त से कभी,देखने ऐसा कुश्ती न मिला,
जमाने में कृष्ण सुदामा सा,वफापरस्त दोस्ती न मिला।
सजाए धूल से घरघुंदिया,खुशी में बचपन जो खिला,
गुल्लिडंडे कन्चे का खेल,वो बिंदास मस्ती न मिला।
मेरे खामियों को दूर कर,हीरा जड़ा तराश कर शिला,
गुरू सा शिल्पकार दूजा,कोईअद्भुत हस्ती न मिला।
जीवन में शोहरत हमें ,अपनी दुआओं से गया दिला,
माँ-बाप सा कोई दूजा,मांझी वाला कश्ती न मिला।
जात पात धर्म पंथ का, जहां न शिकवा हो न गिला,
ढूंढ़ा चराग जलाकर मैं,जमाने में ऐसा बस्ती न मिला।
बांट दो चंद साड़ी कंबल,कबाब संग दो जाम पिला,
लोग बेचते हैं गैरत भी, खरीदी ऐसी सस्ती न मिला।
भ्रष्टाचार हो रहा चहुँओर,घूस से रंगा हर हाथ नीला,
नमकहलाल हैं वे लोग,जिनको मौका परस्ति न मिला।
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*****✍️Kunj Sahu*****
(Teacher)
Karesara, S/Lohara,Kabirdham
(C.G.)Mb. 9993396300
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All copyrights are reserved.
जमाने में कृष्ण सुदामा सा,वफापरस्त दोस्ती न मिला।
सजाए धूल से घरघुंदिया,खुशी में बचपन जो खिला,
गुल्लिडंडे कन्चे का खेल,वो बिंदास मस्ती न मिला।
मेरे खामियों को दूर कर,हीरा जड़ा तराश कर शिला,
गुरू सा शिल्पकार दूजा,कोईअद्भुत हस्ती न मिला।
जीवन में शोहरत हमें ,अपनी दुआओं से गया दिला,
माँ-बाप सा कोई दूजा,मांझी वाला कश्ती न मिला।
जात पात धर्म पंथ का, जहां न शिकवा हो न गिला,
ढूंढ़ा चराग जलाकर मैं,जमाने में ऐसा बस्ती न मिला।
बांट दो चंद साड़ी कंबल,कबाब संग दो जाम पिला,
लोग बेचते हैं गैरत भी, खरीदी ऐसी सस्ती न मिला।
भ्रष्टाचार हो रहा चहुँओर,घूस से रंगा हर हाथ नीला,
नमकहलाल हैं वे लोग,जिनको मौका परस्ति न मिला।
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